धनबाद में 108 एंबुलेंस सेवा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जिले में उपलब्ध 37 एंबुलेंस वाहनों में से 27 खराब बताए गए हैं। यह स्थिति मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाली आपात सेवा की उपलब्धता पर सीधा असर डाल सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई वाहन अस्पताल पहुंचने से पहले ही जवाब दे देते हैं। 108 सेवा का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को तत्काल चिकित्सा सहायता तक पहुंचाना है, इसलिए इतने बड़े हिस्से के वाहनों का खराब होना सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
धनबाद जैसे बड़े जिले में एंबुलेंस सेवा की भरोसेमंद उपलब्धता जरूरी मानी जाती है। सड़क हादसे, अचानक बीमारी या गर्भवती महिलाओं जैसी आपात परिस्थितियों में देरी मरीज और परिजनों के लिए मुश्किल बढ़ा सकती है। उपलब्ध जानकारी में मरीजों पर पड़े किसी खास मामले या परिणाम का उल्लेख नहीं है।
आंकड़े बताते हैं कि कुल बेड़े का बड़ा हिस्सा सेवा से बाहर है। 37 में से 27 वाहनों के खराब होने का मतलब है कि काम करने वाली एंबुलेंस की संख्या सीमित रह जाती है। इससे कॉल आने पर वाहन भेजने, दूरी तय करने और समय पर अस्पताल पहुंचने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल रिपोर्ट में खराबी के कारण, मरम्मत की समयसीमा या वैकल्पिक व्यवस्था से जुड़ा विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है। ऐसे में मुख्य तथ्य यही है कि धनबाद में 108 एंबुलेंस सेवा की हालत खराब बताई गई है और जिले में उपलब्ध वाहनों की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े हुए हैं।
यह मामला स्वास्थ्य विभाग और सेवा संचालक दोनों के लिए प्राथमिकता का विषय बन सकता है। आपात चिकित्सा सेवा में वाहनों का फिट रहना केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि मरीजों की समय पर चिकित्सा तक पहुंच से जुड़ा सवाल है।