रांची में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह को पद से हटाने की मांग की है। मंत्री ने इस संबंध में एक पत्र सौंपते हुए विश्वविद्यालय के वित्तीय मामलों और कुलपति की प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। पत्र में दर्ज बातें आरोप हैं, जिन पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
वित्त मंत्री के अनुसार, वित्त विभाग के अंकेक्षण निदेशालय की रिपोर्ट के आधार पर कुलपति के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर अगले आदेश तक रोक लगाई गई थी। उनका आरोप है कि इससे संबंधित पत्र जारी होने के लगभग पांच घंटे के भीतर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार का तबादला कर दूसरे व्यक्ति को यह जिम्मेदारी दे दी गई।
मंत्री ने राज्यपाल के समक्ष आशंका जताई कि कुलपति के पद पर बने रहने से जांच से जुड़े साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं। इसी आधार पर उन्होंने कुलपति को तत्काल हटाने का आग्रह किया, ताकि आरोपों की पड़ताल स्वतंत्र रूप से हो सके और संबंधित अभिलेख सुरक्षित रहें।
पत्र में अंकेक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए परीक्षा कार्यों के संचालन के नाम पर करीब 2.50 करोड़ रुपये के कथित अनियमित भुगतान का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया और उन्हें बार-बार अवधि विस्तार दिए जाने से जुड़े बिंदुओं पर भी सवाल उठाए गए हैं।
वित्त मंत्री ने अक्टूबर 2025 में आयोजित विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह के खर्च का विषय भी उठाया है। उनके मुताबिक समारोह के लिए लगभग 79.35 लाख रुपये का बजट तैयार हुआ था, लेकिन राज्यपाल सचिवालय की मंजूरी से पहले राशि खर्च किए जाने का आरोप है। वर्ष 2021-22 में डिजिटल बोर्ड के लिए मिले 80 लाख रुपये के उपयोग पर भी उन्होंने वित्तीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
मंत्री की मांग पर राज्यपाल की ओर से किसी निर्णय या कुलपति की प्रतिक्रिया का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं है। ऐसे में फिलहाल मामला वित्त मंत्री द्वारा सौंपे गए पत्र और उसमें उल्लिखित आरोपों तक सीमित है। विश्वविद्यालय से जुड़े वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रश्नों की वास्तविक स्थिति सक्षम स्तर पर जांच और आधिकारिक निर्णय के बाद स्पष्ट होगी।