पलामू जिले की पांच पंचायतों को पहले चरण में जीरो ड्रॉपआउट पंचायत बनाने की तैयारी की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चे का विद्यालय में नामांकन कराने के साथ उसकी पढ़ाई में निरंतरता सुनिश्चित करना है। चयन के लिए जिले में प्रखंड और पंचायत स्तर पर स्कूल से बाहर बच्चों के आंकड़े तैयार किए गए हैं।
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने सभी जिलों को शुरुआती चरण में पांच-पांच पंचायतें चिह्नित करने का निर्देश दिया है। इसके बाद दूसरे चरण में प्रत्येक प्रखंड की पांच-पांच और तीसरे चरण में 10-10 पंचायतों को अभियान में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। चयनित पंचायतों के सभी गांवों और टोलों के बच्चों को उनके पोषक क्षेत्र के प्राथमिक, माध्यमिक तथा प्लस टू विद्यालयों से जोड़ना होगा।
अभियान में केवल नामांकन ही नहीं, बच्चों की नियमित उपस्थिति पर भी नजर रखी जाएगी। किसी महीने में विद्यालय के कुल कार्य दिवसों में 80 से 100 प्रतिशत उपस्थित रहने वाले बच्चे नियमित माने जाएंगे। जिनकी उपस्थिति 80 प्रतिशत से कम होगी, उन्हें अनियमित श्रेणी में रखकर नियमित रूप से स्कूल लाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।
निर्देश के मुताबिक, लगातार 30 विद्यालय दिवस तक गैरहाजिर रहने वाले बच्चे को ड्रॉपआउट माना जाएगा। ऐसे बच्चों की पहचान के बाद विद्यालय स्तर पर उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ने और पढ़ाई जारी रखने की व्यवस्था करनी होगी। इसका दायरा पंचायत के अंतर्गत आने वाले टोले और अन्य बसावटों तक रहेगा, ताकि कोई बच्चा नामांकन से बाहर न छूटे।
जीरो ड्रॉपआउट घोषित विद्यालय के मुख्य द्वार पर नीला झंडा लगाया जाएगा। यह झंडा तभी तक रहेगा, जब तक विद्यालय के पोषक क्षेत्र के सभी बच्चे नामांकित और नियमित बने रहें। संबंधित टोले या बसावट को भी जीरो ड्रॉपआउट हैबिटेशन के रूप में चिह्नित करने की व्यवस्था है।
जीरो ड्रॉपआउट पंचायत का प्रमाणपत्र उपायुक्त स्तर से जारी किया जाएगा, जबकि विद्यालय से संबंधित प्रमाणपत्र मुखिया स्तर से मिलेगा। अभियान के लिए विद्यालय, मुखिया, जिला शिक्षा अधीक्षक और उपायुक्त स्तर पर अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जानी हैं। पलामू में उपलब्ध पंचायतवार आंकड़ों के आधार पर चरणबद्ध चयन और स्कूल से बाहर बच्चों को वापस लाने की कार्रवाई की जाएगी।