पलामू के मनातू में 200 से अधिक महिलाओं ने 70 एकड़ में शुरू की मडुआ की खेती

मनातू की 200 से अधिक महिलाएं 70 एकड़ से ज्यादा भूमि पर मडुआ उगा रही हैं। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को वैकल्पिक आजीविका से जोड़ना है।

2 मिनट पढ़ें 7 बार पढ़ी गई
पलामू के मनातू में खेत में तैयार हो रही मडुआ की फसल

पलामू जिले के मनातू प्रखंड में 200 से अधिक महिलाएं मडुआ की खेती से जुड़ी हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, महिलाओं ने 70 एकड़ से ज्यादा जमीन पर यह मोटा अनाज लगाया है। लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों और अवैध अफीम की खेती की चुनौती के कारण चर्चा में रहे क्षेत्र में इसे वैकल्पिक आजीविका की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

मडुआ की फसल के माध्यम से ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं, को खेती से आय का नया विकल्प उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। खेतों में तैयार हो रही फसल ने इस पहल में शामिल महिला किसानों की उम्मीद बढ़ाई है। योजना से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी मजबूत होने के साथ क्षेत्र की पहचान में सकारात्मक बदलाव आने की भी अपेक्षा है।

मनातू के उरुर गांव की किसान सरिता देवी भी इस बार मडुआ की खेती कर रही हैं। इससे पहले वह अरहर और मक्का उगाती थीं। उनका मानना है कि मडुआ पौष्टिक और महत्वपूर्ण अनाज है तथा पारंपरिक खेती से लोगों का जुड़ना इलाके के लिए लाभकारी हो सकता है। उन्होंने इस फसल को बेहतर भविष्य की उम्मीद के रूप में अपनाया है।

खेती से जुड़ी यह पहल उन महिलाओं के लिए भी उदाहरण बन रही है जो कृषि के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहती हैं। मडुआ को अपनाने से स्थानीय किसानों के पास प्रचलित फसलों के अतिरिक्त एक और विकल्प जुड़ा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में उपज, बाजार मूल्य या महिलाओं की संभावित आय का कोई आकलन नहीं दिया गया है।

झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी की मनातू प्रखंड परियोजना प्रबंधक कुमारी नम्रता के अनुसार, सुदूर क्षेत्र की महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को वैकल्पिक आजीविका से जोड़ने के उद्देश्य से मडुआ की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। फिलहाल इस प्रयास में दो सौ से अधिक महिलाओं की भागीदारी बताई गई है।

आने वाले समय में पहल से और महिलाओं को जोड़ने की योजना है। मौजूदा स्तर पर 70 एकड़ से अधिक क्षेत्र में खेती और बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी मनातू में मोटे अनाज की खेती के विस्तार का संकेत देती है। इसके वास्तविक आर्थिक परिणाम फसल तैयार होने और उसकी बिक्री से संबंधित आगे की जानकारी सामने आने के बाद स्पष्ट होंगे।