पाकुड़ में शहरकोल से प्यादापुर तक प्रस्तावित छह किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण दोबारा शुरू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ी है। भू-अर्जन विभाग ने परियोजना से प्रभावित सात गांवों के 110 रैयतों को मुआवजा भुगतान के लिए नोटिस जारी किया है। विभाग जमीन से जुड़े कागजात का मिलान और सत्यापन पूरा करने के बाद सरकारी दर के अनुसार राशि का भुगतान करेगा।
परियोजना के लिए कुल 1,18,66,220 रुपये मुआवजे के रूप में दिए जाने हैं। नोटिस मिलने के बाद संबंधित रैयतों के दस्तावेजों की जांच की जाएगी। भू-अर्जन पदाधिकारी अमित कुमार के अनुसार, कागजात का सत्यापन और मुआवजा भुगतान पूरा होने के बाद बाईपास का निर्माण शुरू कराया जाएगा।
इस बाईपास का काम वर्ष 2023 में शुरू हुआ था, लेकिन प्रभावित जमीन मालिकों को मुआवजा नहीं मिलने के कारण विरोध हुआ। इसके बाद निर्माण बीच में रुक गया था। अब भुगतान प्रक्रिया प्रारंभ होने से लंबित काम को फिर आगे बढ़ाए जाने की उम्मीद बनी है। हालांकि निर्माण दोबारा शुरू होने की निश्चित तारीख अभी नहीं बताई गई है।
पाकुड़ से पश्चिम बंगाल के धुलियान, फरक्का, रामपुरहाट, नलहाटी और बहरामपुर की ओर जाने वाले भारी वाहन फिलहाल शहर के बीच से गुजरने वाले मुख्य मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। रात में नो-एंट्री हटते ही ट्रकों की कतार लगने से शहरी मार्गों पर दबाव और जाम की स्थिति बनती है।
दिन के समय नो-एंट्री लागू रहने के कारण भारी वाहन चालकों को शहर में प्रवेश की अनुमति मिलने तक इंतजार करना पड़ता है। प्रस्तावित बाईपास तैयार होने पर इन वाहनों को शहर के बाहरी हिस्से से निकाला जा सकेगा। इससे चालकों के इंतजार का समय घटने और मुख्य सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव कम होने की संभावना है।
फिलहाल परियोजना की प्रगति जमीन संबंधी अभिलेखों के सत्यापन और तय मुआवजे के भुगतान पर निर्भर है। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही रुके हुए निर्माण को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होगा। बाईपास पूरा होने पर पाकुड़ शहर को यातायात जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।