पाकुड़ जिले में कमजोर मानसून ने खेती के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जून से अगस्त के बीच जिले में सामान्य से 52 प्रतिशत कम बारिश हुई। इस अवधि में सामान्य वर्षापात 798.8 मिलीमीटर माना जाता है, जबकि इस वर्ष केवल 383 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। कृषि पर निर्भर जिले में इस कमी से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
बारिश कम होने का असर धान की रोपाई पर भी दिखाई दिया। जिले में अब तक लक्ष्य का 88.9 प्रतिशत धनरोपनी कार्य पूरा हुआ है। वर्ष 2025 में इसी अवधि में रोपाई का आंकड़ा 92 प्रतिशत था। लक्ष्य का बड़ा हिस्सा पूरा होने के बावजूद खेतों में पर्याप्त पानी नहीं रहने से रोपी गई फसल को बचाए रखने की चुनौती बनी हुई है।
अगस्त में भी मानसून से अपेक्षित मदद नहीं मिली। इस महीने पाकुड़ में 157.83 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि अगस्त 2025 में वास्तविक वर्षापात 280 मिलीमीटर था। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अगस्त की बारिश करीब 40 प्रतिशत कम रही। जुलाई और अगस्त धान की रोपाई के प्रमुख महीने माने जाते हैं, इसलिए इस दौरान हुई कमी का असर खेतों की नमी और जलस्रोतों पर भी पड़ने लगा है।
किसानों का कहना है कि इस समय खेतों में पर्याप्त पानी होना चाहिए था, लेकिन कई इलाकों में ऐसी स्थिति नहीं है। निचले हिस्सों में कुछ पानी जमा हुआ है, पर अन्य स्थानों पर फसल के लिए और वर्षा की आवश्यकता बनी हुई है। किसानों ने आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होने पर परेशानी बढ़ने की आशंका जताई है।
जिले में पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश ने फिलहाल कुछ राहत दी है। बुधवार को भी कई हिस्सों में देर शाम तक वर्षा हुई। हालांकि किसानों के अनुसार मौजूदा बारिश से केवल कुछ दिनों की जरूरत पूरी होगी और फसल की बेहतर बढ़वार के लिए आगे भी लगातार पानी मिलना आवश्यक है।
जिला कृषि पदाधिकारी अभिषेक मिश्रा के अनुसार कम बारिश के बावजूद धनरोपनी का लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया गया है। उन्होंने भादो महीने में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। अब किसानों की निगाह आगामी वर्षा पर टिकी है, क्योंकि आगे मिलने वाला पानी ही धान की फसल की स्थिति और खेतों में नमी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।