झारखंड हाईकोर्ट ने जमाबंदी से जुड़े मामलों पर एक अहम फैसला दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लंबे समय से चली आ रही जमाबंदी को अधिकारी अपने स्तर से रद्द नहीं कर सकते।
अदालत के फैसले में कहा गया है कि ऐसे विवादों में संबंधित पक्ष को सिविल कोर्ट जाना होगा। यह फैसला जमीन रिकॉर्ड और जमाबंदी से जुड़े मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई की सीमा को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह मामला झारखंड हाईकोर्ट से जुड़ा है। फैसले का असर उन मामलों पर पड़ सकता है, जहां पुरानी जमाबंदी को रद्द करने या चुनौती देने का सवाल उठता है।