बड़गाईं जमीन मामले में हेमंत सोरेन को 21 सितंबर तक अदालत में पेश होने का निर्देश

ईडी की विशेष अदालत ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 21 सितंबर को शाम चार बजे तक प्रत्यक्ष या वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होने को कहा है।

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े बड़गाईं जमीन मामले पर ईडी कोर्ट में सुनवाई

रांची में बड़गाईं अंचल की जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की शनिवार को निर्धारित पेशी टल गई। इसके कारण उनके विरुद्ध आरोप गठन की प्रक्रिया पर सुनवाई नहीं हो सकी। ईडी की विशेष अदालत ने अब उन्हें 21 सितंबर को शाम चार बजे तक प्रत्यक्ष या वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

उपलब्ध विवरण के अनुसार, मुख्यमंत्री की ओर से उनके अधिवक्ता ने अदालत में एक आवेदन दाखिल किया। इसमें कहा गया कि संवैधानिक दायित्वों में व्यस्त रहने के कारण हेमंत सोरेन का व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये उपस्थित होना संभव नहीं था। अधिवक्ता ने आरोप तय करने की प्रक्रिया के लिए अगली तारीख देने का अनुरोध किया।

अदालत ने आवेदन पर विचार करने के बाद अगली सुनवाई के लिए 21 सितंबर की तारीख निर्धारित की। निर्देश के मुताबिक मुख्यमंत्री दोनों में से किसी भी माध्यम से अदालत के समक्ष पेश हो सकते हैं। उनकी उपस्थिति में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और आरोप गठन के विषय पर सुनवाई की जानी है।

यह मामला बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय की जांच के बाद प्रकरण विशेष अदालत में विचाराधीन है। आरोप न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और मुख्यमंत्री के संबंध में आरोप गठन की कार्रवाई अभी शेष बताई गई है।

मामले में कुल 17 आरोपित बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें से 16 लोगों के विरुद्ध आरोप गठित किए जा चुके हैं। पूर्व आईएएस अधिकारी छवि रंजन समेत 15 लोगों पर पहले आरोप तय हुए थे, जबकि शनिवार को राज कुमार पाहन के विरुद्ध भी आरोप गठन की कार्रवाई पूरी की गई।

अब इस प्रकरण में केवल हेमंत सोरेन के विरुद्ध आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया बाकी है। आगामी सुनवाई में उनकी उपस्थिति के बाद अदालत आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी। आरोप गठन का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है; मामले का अंतिम निष्कर्ष न्यायिक सुनवाई और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर तय होगा।