बोकारो की अदालतों में जमानतदारों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए नई सत्यापन व्यवस्था लागू की गई है। अब जमानत बांड पर जमानतदार की तस्वीर लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही, उसके दिए गए पते और दस्तावेजों की जांच संबंधित थाने से कराई जाएगी। इस कदम का उद्देश्य जमानत प्रक्रिया में पहचान और दस्तावेजों से जुड़ी गड़बड़ी को रोकना है।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बोकारो के कार्यालय से 11 सितंबर को जारी आदेश में न्यायालयों को नई प्रक्रिया का पालन करने को कहा गया है। इसके तहत जमानतदार द्वारा प्रस्तुत कागजात संबंधित पुलिस थाने को भेजे जाएंगे। पुलिस को सत्यापन पूरा कर एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में सौंपनी होगी।
आदेश के अनुसार, न्यायालय शुरुआत में जमानत बांड को एक सप्ताह के लिए अस्थायी रूप से स्वीकार करेंगे। संबंधित थाने से उचित जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही बांड की पुष्टि की जाएगी। यानी जमानतदार की ओर से दस्तावेज जमा कर देना भर अंतिम स्वीकृति के लिए पर्याप्त नहीं होगा; पुलिस सत्यापन भी प्रक्रिया का आवश्यक हिस्सा रहेगा।
नई व्यवस्था में जमानतदार की तस्वीर बांड पर मौजूद रहने से उसकी पहचान को रिकॉर्ड के साथ जोड़ने में सहायता मिलेगी। पते और अन्य दस्तावेजों की थाना स्तर पर जांच होने से अदालत को प्रस्तुत जानकारी की पुष्टि की जा सकेगी। उपलब्ध आदेश में सभी न्यायालयों को जमानत बांड पर फोटो अनिवार्य रूप से लगाने का निर्देश दिया गया है।
इस प्रक्रिया से पैसे लेकर जमानत कराने वाले कथित पेशेवर जमानतदारों और फर्जी पहचान के इस्तेमाल पर अंकुश लगने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि किसी जमानतदार के संबंध में अंतिम पुष्टि पुलिस की सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही की जाएगी। इस प्रकार अदालत और थाना, दोनों स्तरों पर अभिलेखों की जांच होगी।
आदेश की जानकारी अधिवक्ताओं तक पहुंचाने के लिए बोकारो बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महासचिव से भी अनुरोध किया गया है। नई व्यवस्था के बाद अधिवक्ताओं और जमानतदारों को फोटो, सही पता तथा संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे, जबकि पुलिस थानों को निर्धारित एक सप्ताह की अवधि में जांच रिपोर्ट न्यायालय भेजनी होगी।