बोकारो जिले की अमाइनगर पंचायत के मयूरडूबी में रविवार को झारखंड आंदोलनकारी लीलू, हीरू और पटल बाउरी का 49वां शहादत दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में पहुंचे आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो ने तीनों आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी तथा उनकी स्मृति में बनने वाली बेदी का भूमि पूजन किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महतो ने राज्य सरकार की रोजगार और शिक्षा संबंधी नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को पर्याप्त रोजगार और शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के बजाय योजनाओं तक सीमित किया जा रहा है। उन्होंने मंईयां सम्मान योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल आर्थिक सहायता देना महिला सशक्तीकरण के लिए पर्याप्त नहीं है।
आजसू अध्यक्ष ने महिला सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया और सरकार की कार्यप्रणाली की आलोचना की। उनके संबोधन का प्रमुख जोर युवाओं के भविष्य, रोजगार के अवसर और राजनीतिक चेतना पर रहा। ये बातें राजनीतिक आरोपों के रूप में कार्यक्रम के मंच से कही गईं।
महतो ने झारखंड आंदोलन में बाउरी समाज की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि लीलू, हीरू और पटल बाउरी पूरे राज्य के गौरव हैं, लेकिन अब तक उन्हें शहीद का दर्जा नहीं मिला है। उनके अनुसार, तीनों की शहादत से जुड़ी परिस्थितियों और उस समय हुई गोलीबारी के इतिहास को सामने लाने की आवश्यकता है।
उन्होंने घोषणा की कि आजसू इन आंदोलनकारियों को सम्मान दिलाने के लिए प्रयास जारी रखेगी। अगले वर्ष 50वां शहादत दिवस बड़े स्तर पर मनाने और तीनों आंदोलनकारियों की आदमकद प्रतिमाएं स्थापित करने की बात भी उन्होंने कही।
कार्यक्रम में गोमिया के पूर्व विधायक डॉ. लंबोदर महतो ने भी राज्य सरकार की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि सत्यापन नहीं होने के कारण 58 हजार से अधिक आंदोलनकारियों के आवेदन लंबित हैं। इस अवसर पर पूर्व विधायक रामचंद्र सहिस समेत पार्टी के कई पदाधिकारी और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।