पलामू के मेदिनीनगर स्थित मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जन्म प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया की जांच के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, एक अगस्त से 13 अगस्त के बीच जारी प्रमाणपत्रों की पड़ताल में 233 जन्म प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। पूरे मामले की जांच अभी जारी है।
अस्पताल के उपाधीक्षक सह रजिस्ट्रार डॉ. विजय कुमार सिंह ने बताया कि फिलहाल केवल 13 दिनों में जारी प्रमाणपत्रों की जांच का यह नतीजा सामने आया है। अब एक जनवरी से 31 अगस्त तक अस्पताल से निर्गत सभी जन्म प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया जा रहा है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संदिग्ध या फर्जी प्रमाणपत्रों की वास्तविक संख्या स्पष्ट हो सकेगी।
इससे पहले अस्पताल में कथित रूप से गलत तरीके से 33 जन्म प्रमाणपत्र तैयार कर वितरित किए जाने का मामला सामने आया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन सभी 33 प्रमाणपत्रों को बाद में रद्द कर दिया गया। इसके बाद जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था की विस्तृत जांच शुरू की गई।
नए सत्यापन में महज 13 दिनों के रिकॉर्ड से 233 प्रमाणपत्र फर्जी मिलने की जानकारी ने मामले का दायरा बढ़ा दिया है। हालांकि जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए अभी यह साफ नहीं है कि जनवरी से अगस्त के पूरे रिकॉर्ड में कुल कितने प्रमाणपत्रों पर सवाल उठेंगे। अस्पताल प्रशासन शेष अवधि के दस्तावेजों की भी जांच कर रहा है।
मामले में उपाधीक्षक की ओर से मेदिनीनगर शहर थाना में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिए जाने की बात भी सामने आई है। उपलब्ध विवरण में किसी व्यक्ति की भूमिका या जिम्मेदारी तय होने की जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले किसी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
जन्म प्रमाणपत्र एक महत्वपूर्ण आधिकारिक दस्तावेज है, इसलिए अस्पताल से जारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता से जुड़ी यह जांच सार्वजनिक महत्व रखती है। अब आगे की स्थिति सभी संबंधित अभिलेखों के सत्यापन और जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगी।