रांची स्थित झारखंड कांग्रेस मुख्यालय में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के बयानों और उनसे जुड़े अनुशासनहीनता के मामले पर पार्टी की अनुशासन समिति की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता रामेश्वर उरांव ने की। उपलब्ध जानकारी में समिति की ओर से किसी अंतिम निर्णय की घोषणा का उल्लेख नहीं है।
बैठक के दौरान योगेंद्र साव ने अपने पहले के बयानों का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े प्रश्न उठाना उनकी जिम्मेदारी है और इसके लिए माफी मांगने की जरूरत नहीं है। साव के अनुसार उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने भी विस्तार से अपना पक्ष रख दिया है।
पूर्व मंत्री ने कहा कि कांग्रेस एक अनुशासित पार्टी है और वह संगठन के निर्णय का सम्मान करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया कि अनुशासनात्मक कार्रवाई की चर्चा केवल कांग्रेस नेताओं को लेकर क्यों हो रही है, जबकि झामुमो के कुछ नेताओं की ओर से भी अधिकारियों और प्रशासन से संबंधित बयान दिए गए हैं।
साव ने कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के गठबंधन के बीच अपनी पार्टी की स्वतंत्र राजनीतिक भूमिका पर जोर दिया। उनका कहना था कि कांग्रेस को अपने कार्यकर्ताओं और जनता के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि गठबंधन सरकार में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रखंड से जिला स्तर तक पार्टी कार्यकर्ताओं को अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने में कठिनाई होती है। साव ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता जनता के बीच रहकर उनकी समस्याएं समझते हैं और कई बार इन्हीं मुद्दों पर आंदोलन करते हुए कानूनी कार्रवाई का सामना भी करते हैं।
योगेंद्र साव ने विस्थापन, जमीन अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े विषय भी उठाए। उन्होंने हजारीबाग के विभिन्न क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए प्रभावित लोगों और रैयतों की समस्याएं गंभीरता से सुनने की मांग की। अब इस मामले में अनुशासन समिति और पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर नजर रहेगी।