रांची सहित झारखंड के विभिन्न हिस्सों में बार, रेस्टोरेंट, पार्टियों और आयोजनों के माध्यम से कथित रूप से नशीले पदार्थों की आपूर्ति के मामले की जांच की मांग झारखंड हाईकोर्ट तक पहुंची है। सुनील कुमार महतो ने जनहित याचिका दायर कर राज्य में सामने आए ड्रग्स तस्करी और नशीले पदार्थों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की जांच कराने तथा उसकी विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने का अनुरोध किया है।
याचिका में राज्य सरकार, पुलिस महानिदेशक, रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक, लालपुर और गोंदा थाना प्रभारियों, ड्रग कंट्रोलर, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के रांची जोन और रांची नगर निगम सहित कई पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है। कुछ बार और रेस्टोरेंट भी प्रतिवादियों की सूची में शामिल बताए गए हैं।
याचिकाकर्ता ने खास तौर पर तीन अक्टूबर की रात रांची के बार और होटलों में हुई छापेमारी का उल्लेख किया है। अदालत से यह स्पष्ट कराने की मांग की गई है कि उस कार्रवाई के दौरान ड्रग्स से संबंधित मामलों की भी जांच की गई थी या नहीं। याचिका में सितंबर और अक्टूबर के दौरान प्रकाशित विभिन्न मीडिया रिपोर्टों का आधार लिया गया है।
इन रिपोर्टों के हवाले से दुमका में 24 सितंबर को 1,710 बोतल कफ सिरप और 7,200 अल्प्राजोलम टैबलेट की बरामदगी तथा दो लोगों की गिरफ्तारी का उल्लेख किया गया है। इसी तरह दो अक्टूबर को रांची के नगड़ी थाना क्षेत्र में एनसीबी और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में करीब 97 किलोग्राम गांजा मिलने और तीन लोगों की गिरफ्तारी की बात याचिका में रखी गई है।
याचिका में खूंटी में चार अक्टूबर को 120 बोतल कफ सिरप और 2,295 टैबलेट के साथ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी का भी हवाला है। इसके अलावा देवघर में 24 अक्टूबर को करीब 1.8 किलोग्राम गांजा और 10.77 ग्राम संदिग्ध ब्राउन शुगर बरामद किए जाने से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है। ये विवरण याचिका में रखे गए दावे हैं।
रांची-जमशेदपुर से जुड़े कथित नेटवर्क को लेकर 21 से 24 अक्टूबर के बीच हुई एनसीबी की कार्रवाई का उल्लेख भी याचिका में किया गया है। इसमें छह लोगों की गिरफ्तारी और कोकीन, एमडीएमए तथा गांजा जब्त किए जाने की बात कही गई है। याचिका का आग्रह है कि अलग-अलग स्थानों पर सामने आए इन मामलों और रेव पार्टियों या आयोजन कंपनियों की कथित भूमिका की समग्र जांच कर स्थिति अदालत के सामने स्पष्ट की जाए।