रांची नगर निगम ने करीब 15 एकड़ जमीन कराई अतिक्रमण मुक्त, जनोपयोगी विकास की तैयारी

रांची नगर निगम ने बीते एक वर्ष में विभिन्न इलाकों की करीब 15 एकड़ भूमि से अतिक्रमण हटाया है। इन संपत्तियों को सुरक्षित कर वेंडिंग जोन, आश्रय गृह और दूसरी नागरिक सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

2 मिनट पढ़ें 5 बार पढ़ी गई
रांची में नगर निगम की अतिक्रमण मुक्त कराई गई भूमि और विकास की तैयारी

रांची नगर निगम ने पिछले एक वर्ष के दौरान शहर के अलग-अलग इलाकों में स्थित अपनी दर्जनों संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। खाली कराई गई भूमि का कुल क्षेत्रफल करीब 15 एकड़ बताया गया है। निगम अब इन जमीनों का सीमांकन और अभिलेखीकरण करने के साथ बाउंड्री वॉल बनाकर उन्हें सुरक्षित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।

कार्रवाई के दायरे में एदलहातू की करीब 4.8 एकड़, बड़ा घाघरा की लगभग 2.80 एकड़, मानिटोला की करीब पांच एकड़ और ग्वाला टोली, डोरंडा की लगभग 1.20 एकड़ भूमि शामिल है। कुसुम बिहार, करमटोली तालाब, उर्दू स्कूल थड़पखना, पिंजरा पोखर-गौशाला चौक, डोरंडा बाजार और बूटी मोड़ चौक की निगम भूमि पर भी संरक्षण संबंधी कार्रवाई की गई है।

इसके अतिरिक्त मोरहाबादी इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन, मोरहाबादी रजिस्ट्री ऑफिस, नागा बाबा खटाल एमआरएफ सेंटर, ट्रेकर स्टैंड एमआरएफ सेंटर और बकरी बाजार स्टोर जैसी परिसंपत्तियों को सुरक्षित किया जा रहा है। धुर्वा, जगन्नाथपुर और खादगढ़ा स्थित आश्रय गृहों की परिसंपत्तियों के चारों ओर बाउंड्री वॉल बनाने का काम भी चल रहा है।

नगर निगम इन जमीनों को केवल खाली रखकर छोड़ने के बजाय जनोपयोगी सुविधाओं के लिए विकसित करने की तैयारी में है। मोरहाबादी इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन, मोरहाबादी रजिस्ट्री ऑफिस, बूटी मोड़ और डोरंडा बाजार क्षेत्र में व्यवस्थित वेंडिंग जोन प्रस्तावित हैं। डोरंडा बाजार और लोआडीह में दैनिक मजदूरों के लिए लेबर चौक विकसित किए जाने की जानकारी भी दी गई है।

निगम की भावी योजना में अन्य उपलब्ध भूमियों पर लाइब्रेरी, आश्रय गृह, सार्वजनिक सुविधाएं तथा स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ा आधारभूत ढांचा विकसित करना शामिल है। नगर निगम का कहना है कि स्पष्ट स्वामित्व और सुरक्षित संपत्तियां उसकी वित्तीय तथा संस्थागत क्षमता मजबूत करने में भी सहायक हो सकती हैं।

नगर आयुक्त सुशांत गौरव के अनुसार, अभियान का उद्देश्य अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मुक्त कराई गई भूमि को सुरक्षित रखते हुए उसका जनहित में उपयोग सुनिश्चित करना भी है। निगम ने आगे भी अपनी भूमियों का सर्वेक्षण, सीमांकन, अभिलेखीकरण, अतिक्रमणमुक्ति और संरक्षण जारी रखने की बात कही है, ताकि खाली कराई गई संपत्तियों पर दोबारा कब्जा न हो।