रांची में झारखंड का पहला कृषि संग्रहालय लगभग तैयार हो गया है। कांके रोड स्थित कृषि निदेशालय परिसर की लक्ष्मी निवास कोठी में विकसित किए जा रहे इस केंद्र में राज्य की प्राचीन कृषि परंपराओं से लेकर आधुनिक खेती तक के बदलाव को एक स्थान पर दिखाने की तैयारी है।
संग्रहालय में पुराने कृषि उपकरणों के साथ खेती की नई तकनीकों से जुड़े मॉडल रखे जाएंगे। इनमें पठारी क्षेत्रों में सीढ़ीदार खेत बनाकर खेती करने की पद्धति, जैविक खेती, जैविक खाद तैयार करने की तकनीक, पॉलीहाउस और ड्रिप सिंचाई को शामिल किया जा रहा है।
खेती और पशुपालन को साथ जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने की अवधारणा भी यहां प्रदर्शित होगी। एकीकृत खेती के मॉडल के माध्यम से आगंतुक यह समझ सकेंगे कि कृषि के साथ दूसरी गतिविधियों को जोड़कर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है।
संग्रहालय के प्रवेश क्षेत्र में बेकार धातु से किसान की प्रतिमा तैयार की जा रही है। इसके प्रारूप में किसान को गेहूं की बाली और कृषि औजारों के साथ दिखाया जाएगा। यह प्रतिमा संग्रहालय की कृषि-केंद्रित विषयवस्तु का परिचय देने वाली प्रमुख प्रदर्शनी होगी।
कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज के अनुसार, संग्रहालय तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है। विभाग 15 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर इसका लोकार्पण कराने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, लोकार्पण की अंतिम तिथि अभी निर्धारित नहीं हुई है और इसे विभागीय मंत्री या मुख्यमंत्री से कराने की उम्मीद जताई गई है।
यह केंद्र आम लोगों को झारखंड के कृषि इतिहास और खेती में आए तकनीकी बदलावों की जानकारी देगा। कृषि विज्ञान की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए भी इसे उपयोगी माना जा रहा है। विभिन्न मॉडलों के जरिए पारंपरिक ज्ञान और वर्तमान कृषि पद्धतियों को एक साथ समझने का अवसर मिलेगा।