रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के नौवें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने 11 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किया। समारोह में 335 स्नातक विद्यार्थियों को डिग्रियां दी गईं। इनमें कृषि संकाय के 231, वानिकी संकाय के 24 तथा पशु चिकित्सा एवं पशुपालन संकाय के 80 विद्यार्थी शामिल थे।
विश्वविद्यालय के अनुसार, 48 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर और चार विद्यार्थियों को पीएचडी की डिग्री भी प्रदान की गई। एमएससी एग्रोनॉमी सत्र 2022-23 की छात्रा दरखशां तैय्यब को सभी पाठ्यक्रमों में सर्वाधिक 8.953 ओजीपीए हासिल करने पर कुलाधिपति स्वर्ण पदक दिया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि देश की समृद्धि किसानों की प्रगति से सीधे जुड़ी है। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और कौशल का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र तथा किसानों की वास्तविक समस्याओं के समाधान में करने को कहा। उनके अनुसार, शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी होना चाहिए।
राज्यपाल ने कृषि अनुसंधान के परिणामों को प्रयोगशालाओं और अनुसंधान फार्मों तक सीमित नहीं रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इनका प्रभाव किसानों के खेतों में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने युवाओं से किसानों तक तकनीक पहुंचाने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए ईमानदारी तथा प्रतिबद्धता के साथ काम करने का आह्वान किया, ताकि किसान एक वर्ष में दो से तीन फसलें ले सकें।
कुलपति डॉ. एससी दुबे ने कृषि को खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण आजीविका और राष्ट्रीय विकास की आधारशिला बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन की उपलब्धियों का आकलन केवल पद, वेतन या प्रतिष्ठा के आधार पर नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में किए गए सुधार, सहायता, ज्ञान के प्रसार और अपनाए गए मूल्यों से करने को कहा।
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पिछले वर्ष 1.11 लाख से अधिक किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी पहुंचाई और 10 उन्नत फसल किस्में विकसित कर जारी कीं। समारोह में विभिन्न स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक देकर उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों को सम्मानित किया गया।