रांची के नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ में बुधवार को मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची-2026 विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। इसका आयोजन झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय और केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के सहयोग से किया जा रहा है। आईआईएम रांची, एनयूएसआरएल और सेंट जेवियर्स कॉलेज इसमें नॉलेज पार्टनर हैं।
उद्घाटन सत्र में भारत निर्वाचन आयोग के प्रधान सचिव अरविंद आनंद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन का केंद्र मतदाता अभिलेखों की शुद्धता, समावेशी पंजीकरण और सूची को नियमित रूप से अद्यतन रखने से जुड़े व्यावहारिक तथा अकादमिक पहलुओं पर है। पहले दिन पैनल चर्चा के साथ छह तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के अनुसार, सम्मेलन के लिए 800 से अधिक विश्वविद्यालयों और संस्थानों से संपर्क किया गया था। कुल 230 शोध-सार प्राप्त हुए, जिनकी समीक्षा स्वतंत्र अकादमिक विशेषज्ञ समिति ने की। समीक्षा के बाद 80 सार चुने गए और उनमें से 58 शोध-पत्र प्रकाशन एवं विचार-विमर्श के लिए चयनित किए गए हैं।
के. रवि कुमार ने कहा कि निर्वाचन प्रबंधन के व्यावहारिक अनुभवों को अकादमिक शोध के साथ जोड़ने से मतदाता सूची को अधिक भरोसेमंद और समावेशी बनाने में सहायता मिल सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि मतदाता रिकॉर्ड की शुद्धता बढ़ाने के लिए तकनीक और डेटाबेस आधारित सत्यापन का उपयोग चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।
एनयूएसआरएल के कुलपति प्रो. डॉ. अशोक आर. पाटिल ने मतदाता सूची को लोकतांत्रिक भागीदारी का प्रवेश द्वार बताया। सेंट जेवियर्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की भूमिका रेखांकित करते हुए परिसर आधारित मतदाता पंजीकरण, नागरिक शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रमों को महत्वपूर्ण बताया।
केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर ने कहा कि विभिन्न संस्थानों का सहयोग अकादमिक अध्ययन और निर्वाचन प्रशासन के अनुभवों को साझा मंच देता है। सम्मेलन से सामने आने वाले प्रमुख निष्कर्षों और चयनित 58 शोध-पत्रों को मुद्रित रूप के साथ निःशुल्क डिजिटल प्रारूप में भी प्रकाशित करने की योजना है।