रांची में मतदाता पंजीकरण पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू, 58 शोध-पत्र चयनित

एनयूएसआरएल रांची में शुरू हुए सम्मेलन में मतदाता सूची की शुद्धता, समावेशन, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय पंजीकरण प्रणालियों पर विमर्श किया जा रहा है।

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रांची के एनयूएसआरएल में मतदाता पंजीकरण पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन सत्र

रांची स्थित नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (एनयूएसआरएल) में बुधवार को मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। उद्घाटन सत्र में निर्वाचन प्रशासन, कानून और शिक्षा जगत से जुड़े प्रतिनिधियों ने मतदाता सूची की शुद्धता, समावेशन, पारदर्शिता और तकनीक के उपयोग पर विचार रखे। इस अवसर पर सम्मेलन पुस्तक और स्मारिका का विमोचन भी किया गया।

सम्मेलन में भारत निर्वाचन आयोग के प्रधान सचिव अरविंद आनंद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार, केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर, एनयूएसआरएल के कुलपति प्रो. अशोक आर. पाटिल और सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर सहित शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया। आईआईएम रांची, एनयूएसआरएल और सेंट जेवियर्स कॉलेज सम्मेलन के नॉलेज पार्टनर हैं।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य विशेष गहन पुनरीक्षण की मौजूदा प्रक्रिया से आगे बढ़कर मतदाता पंजीकरण को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में समझना है। सम्मेलन के लिए 800 से अधिक विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से संपर्क किया गया था। कुल 230 शोध-सार प्राप्त हुए, जिनमें स्वतंत्र अकादमिक विशेषज्ञ समिति ने 80 को संक्षिप्त सूची में रखा और अंततः 58 शोध-पत्र प्रकाशन तथा चर्चा के लिए चुने गए।

सम्मेलन में विभिन्न देशों में प्रचलित सक्रिय, स्वचालित और हाइब्रिड पंजीकरण प्रणालियों पर भी चर्चा हुई। जनसंख्या डेटाबेस, सिविल रजिस्ट्री, बायोमेट्रिक्स और मतदाता रिकॉर्ड के सतत अद्यतन जैसी व्यवस्थाओं को विमर्श में शामिल किया गया। भारतीय व्यवस्था के संदर्भ में संवैधानिक और कानूनी ढांचे, क्षेत्रीय सत्यापन तथा राजनीतिक दलों की भागीदारी को मतदाता सूची प्रबंधन के महत्वपूर्ण हिस्सों के रूप में रेखांकित किया गया।

के. रवि कुमार के अनुसार, मतदाता अभिलेखों की विसंगतियां पहचानने और उनकी शुद्धता सुधारने के लिए तकनीक, डेटाबेस आधारित सत्यापन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का क्रमिक उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ क्षेत्रीय जांच, हितधारकों की सहभागिता, न्यायिक समीक्षा और निर्वाचन आयोग की निगरानी भी प्रक्रिया का हिस्सा है। सम्मेलन से निकलने वाले निष्कर्षों को भौतिक तथा निःशुल्क डिजिटल स्वरूप में प्रकाशित करने की योजना है।

एनयूएसआरएल के कुलपति प्रो. पाटिल ने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए होना चाहिए, लेकिन वह मानवीय विवेक और निर्णय का विकल्प नहीं बन सकती। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सही ढंग से दर्ज हो, कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न रहे और नागरिक भरोसे के साथ निर्वाचन प्रक्रिया में भाग ले सकें।