रांची विश्वविद्यालय ने शोधार्थियों की फेलोशिप के लिए आवेदन जमा करने की व्यवस्था में बदलाव किया है। नई प्रक्रिया के अनुसार शोधार्थी अब अपना आवेदन सीधे विश्वविद्यालय के शोध निदेशालय में नहीं दे सकेंगे। आवेदन संबंधित विभागाध्यक्ष के माध्यम से भेजना अनिवार्य कर दिया गया है।
विश्वविद्यालय के शोध निदेशालय ने इस संबंध में सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश जारी किए हैं। विभागाध्यक्षों को शोधार्थी का सत्यापित आवेदन पत्र, उपस्थिति विवरण और अन्य आवश्यक दस्तावेज साथ में भेजने होंगे। सीधे शोधार्थी द्वारा लाया गया आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
फेलोशिप से संबंधित पोर्टल प्रत्येक महीने की पहली तारीख से आठ तारीख तक खुला रहेगा। इसी अवधि में शोधार्थियों के दस्तावेज अपलोड किए जाएंगे। विभागाध्यक्षों को आवेदन और संलग्न कागजात हर महीने की तीन तारीख तक मोरहाबादी स्थित शोध निदेशालय में जमा कराने का निर्देश दिया गया है।
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि फेलोशिप के लिए निर्धारित आवेदन प्रपत्र का उपयोग करना जरूरी होगा। अधूरा आवेदन जमा होने की स्थिति में भुगतान की प्रक्रिया में देरी हो सकती है। इस कारण विभागों को आवेदन भेजने से पहले दस्तावेजों और उपस्थिति संबंधी विवरण की जांच करनी होगी।
निर्देश में गलत या फर्जी जानकारी देने की जिम्मेदारी भी तय की गई है। ऐसी जानकारी मिलने पर संबंधित शोधार्थी और उनके सुपरवाइजर जिम्मेदार होंगे। कुलपति डॉ. सरोज शर्मा ने सभी विभागाध्यक्षों को नई व्यवस्था का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है।
बदली हुई प्रक्रिया में विभागाध्यक्ष आवेदन की जांच और उसे आगे भेजने की मुख्य कड़ी होंगे। शोधार्थियों को अब मासिक समय-सारिणी के अनुसार अपने विभाग में पूरे दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे, ताकि विभाग उन्हें निर्धारित तारीख तक शोध निदेशालय भेज सके और फेलोशिप की आगे की कार्रवाई समय पर हो सके।