रामायण पर एक वर्ष में 11 पुस्तकें लिखने पर धनबाद की डॉ. मीतू सिन्हा को रिकॉर्ड सम्मान

धनबाद की लेखिका डॉ. मीतू सिन्हा को रामायण पर एक वर्ष में 11 पुस्तकें लिखने के लिए प्रमाणपत्र, स्मृति चिह्न और पदक प्रदान किया गया है।

2 मिनट पढ़ें 4 बार पढ़ी गई
धनबाद की लेखिका डॉ. मीतू सिन्हा को मिले रिकॉर्ड सम्मान से संबंधित तस्वीर

धनबाद की लेखिका डॉ. मीतू सिन्हा को रामायण पर एक वर्ष में 11 पुस्तकें लिखने की उपलब्धि के लिए रिकॉर्ड सम्मान मिला है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनका नाम लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। इस अवसर पर उन्हें प्रमाणपत्र, स्मृति चिह्न और पदक प्रदान किए गए। उनकी उपलब्धि पर लंदन हेराल्ड पत्रिका में एक आलेख प्रकाशित होने की जानकारी भी दी गई है।

डॉ. सिन्हा ने अब तक विविध विषयों पर कुल 26 पुस्तकें लिखी हैं। इनमें 15 पुस्तकें रामायण से संबंधित हैं। रिकॉर्ड के लिए एक वर्ष के भीतर लिखी गई 11 पुस्तकों को आधार बनाया गया है। लेखिका के मुताबिक, इन रचनाओं में रामायण के अलग-अलग पात्रों, प्रसंगों और भावनात्मक पक्षों को केंद्र में रखा गया है।

इन पुस्तकों में ‘भरत के राम’ को प्रबंध काव्य और ‘सिया स्वयंवर’ को खंड काव्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ‘अंगद रावण संवाद’, ‘संजीवनी बूटी’ और ‘सती सुलोचना’ में भी अलग-अलग प्रसंगों को विषय बनाया गया है। ‘लक्ष्मण की उर्मिला’ उर्मिला के मनोभावों पर केंद्रित है, जबकि गद्य में लिखी गई ‘राम कथा’ में श्रीराम की व्यथा और भावों को अभिव्यक्त किया गया है।

लेखिका की अन्य रचनाओं में ‘पंचवटी प्रसंग’, ‘नागपाश’, ‘बाली संहार’ और ‘कुंभकर्ण वध’ शामिल हैं। इन पुस्तकों में पंचवटी की घटनाओं, मेघनाद के नागपाश, बाली-सुग्रीव की कथा और कुंभकर्ण से जुड़े प्रसंगों को अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। डॉ. सिन्हा का कहना है कि प्रत्येक पुस्तक की विषयवस्तु और दृष्टि अलग रखी गई है।

प्राप्त विवरण के अनुसार, डॉ. मीतू सिन्हा का नाम एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और ओंग बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी शामिल किया गया है। एक वर्ष में लगातार 11 पुस्तकें तैयार करने के लिए मिली यह मान्यता धनबाद की साहित्यिक गतिविधियों से जुड़ी उल्लेखनीय उपलब्धि है। सम्मान के साथ उनकी रामायण-केंद्रित रचनाओं और लेखन यात्रा को भी पहचान मिली है।