रिम्स में नियुक्तियों, उपकरणों और मरम्मत से जुड़े कामों में देरी पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मामला संस्थान के उन कामों से जुड़ा है, जिनमें समय पर निर्णय और क्रियान्वयन अपेक्षित था।
रिपोर्ट में देरी के तीन मुख्य बिंदु सामने आए हैं: नियुक्तियां, उपकरण और मरम्मत। ये तीनों विषय रिम्स के नियमित कामकाज से जुड़े हैं, इसलिए अदालत की सख्ती को सार्वजनिक महत्व के मामले के तौर पर देखा जा रहा है।
एक करोड़ रुपये से अधिक की खरीद की समीक्षा भी इस मामले का हिस्सा बताई गई है। उपलब्ध विवरण में खरीद की वस्तु, विभाग या प्रक्रिया का अलग-अलग ब्योरा नहीं दिया गया है, इसलिए इस रिपोर्ट में उन्हीं तथ्यों तक बात सीमित रखी जा रही है।
नियुक्तियों में देरी मानव संसाधन से जुड़ा मुद्दा है, जबकि उपकरणों और मरम्मत में देरी संस्थान की व्यवस्था से संबंधित सवाल उठाती है। अभी किसी खास पद, मशीन या मरम्मत कार्य का नाम सामने नहीं है।
आगे की स्थिति अदालत में होने वाली समीक्षा और संबंधित पक्षों की तरफ से रखे जाने वाले जवाब से स्पष्ट होगी। फिलहाल पुष्ट तथ्य यही हैं कि रिम्स से जुड़े लंबित कामों पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है और बड़ी खरीद की समीक्षा का विषय भी उठा है।