वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के तहत सितंबर 2026 में झारखंड के 4,049 प्रवासी राशन कार्डधारक परिवारों ने राज्य से बाहर खाद्यान्न लिया। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के जारी आंकड़ों के अनुसार, इसी अवधि में दूसरे राज्यों के 2,730 कार्डधारकों ने झारखंड के अलग-अलग जिलों में राशन उठाया। इस तरह बाहर जाकर योजना का उपयोग करने वाले झारखंडी परिवारों की संख्या राज्य में आए लाभार्थियों से अधिक रही।
झारखंड से बाहर राशन लेने वाले परिवारों में गिरिडीह की भागीदारी सबसे अधिक रही। जिले के 945 परिवारों ने दूसरे राज्यों में योजना का लाभ लिया। इसके बाद हजारीबाग के 474 और गोड्डा के 466 परिवार शामिल रहे। उपलब्ध विवरण में नई दिल्ली और महाराष्ट्र को झारखंड के प्रवासी परिवारों के लिए प्रमुख गंतव्य बताया गया है।
नई दिल्ली में राशन लेने वालों में गिरिडीह के 332 परिवार दर्ज किए गए। वहां गोड्डा के 294, पलामू के 288, हजारीबाग के 221 और कोडरमा के 176 परिवारों ने भी अपने राशन कार्ड का उपयोग किया। महाराष्ट्र में अकेले गिरिडीह के 556 और हजारीबाग के 221 परिवारों के योजना से लाभान्वित होने का उल्लेख है।
झारखंडी कार्डधारकों ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव तथा पश्चिम बंगाल में भी राशन लिया। ये आंकड़े योजना की अंतरराज्यीय पोर्टेबिलिटी के उपयोग को दिखाते हैं, जिसके तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में शामिल लाभार्थी अपने गृह राज्य से बाहर भी उचित मूल्य की दुकान से सब्सिडी वाला खाद्यान्न प्राप्त कर सकते हैं।
दूसरी ओर, बाहर से झारखंड आकर राशन लेने वाले 2,730 परिवारों में बिहार के कार्डधारकों की संख्या 2,510 रही। इनमें सबसे अधिक 987 परिवारों ने रांची में राशन उठाया। बोकारो में 361, पूर्वी सिंहभूम में 272 और धनबाद में 151 बिहारी कार्डधारक परिवारों ने योजना का लाभ लिया।
उत्तर प्रदेश के 161, महाराष्ट्र के 18, हरियाणा के 14, मध्य प्रदेश के 11, छत्तीसगढ़ के 10 और असम के तीन कार्डधारकों ने भी झारखंड में खाद्यान्न प्राप्त किया। पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और गुजरात से एक-एक कार्डधारक का उपयोग दर्ज हुआ। सितंबर के आंकड़े रोजगार या अन्य कारणों से गृह राज्य से दूर रहने वाले परिवारों के बीच राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी की उपयोगिता को रेखांकित करते हैं।