विकसित भारत सम्मेलन में झारखंड ने केंद्र से विशेष सहयोग और वित्तीय अधिकारों की मांग रखी

नई दिल्ली के दो दिवसीय सम्मेलन में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने खनन सेस, जीएसटी क्षतिपूर्ति और केंद्रीय योजनाओं में वित्तीय हिस्सेदारी से जुड़े मुद्दे उठाए।

2 मिनट पढ़ें 7 बार पढ़ी गई
विकसित भारत सम्मेलन में झारखंड की वित्तीय मांगें रखते वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर

झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों के लिए विशेष केंद्रीय सहयोग की जरूरत बताई। केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से 18 और 19 सितंबर को भारत मंडपम में आयोजित सम्मेलन का विषय विकसित भारत की यात्रा के वित्तपोषण पर केंद्रित था। मंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य तक पहुंचने के लिए राज्यों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना आवश्यक है।

सम्मेलन में झारखंड की ओर से तीन प्रमुख वित्तीय मांगें रखी गईं। इनमें खनन पर सेस लगाने का अधिकार राज्यों को फिर देने, जीएसटी से हुई क्षति की भरपाई करने और जी-राम-जी योजना में केंद्र तथा राज्य के बीच 90:10 का वित्तीय अनुपात बहाल करने की मांग शामिल है। वित्त मंत्री ने इन विषयों को राज्य के राजस्व और विकास योजनाओं से जुड़ा बताया।

राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, खनिज क्षेत्र से संबंधित नीतिगत और कर बदलावों के कारण झारखंड को संभावित रूप से 20 हजार से 22 हजार करोड़ रुपये तक की आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा वाले राज्य को उसके संसाधनों से जुड़े निर्णयों और कर व्यवस्था में पर्याप्त अधिकार तथा सहायता मिलनी चाहिए।

वित्त मंत्री ने विकसित भारत की अवधारणा को केवल सकल घरेलू उत्पाद, प्रति व्यक्ति आय या विनिर्माण उत्पादन में वृद्धि तक सीमित नहीं रखने की बात कही। उनका कहना था कि विकास के आकलन में लोगों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति भी शामिल होनी चाहिए। उन्होंने आय की असमानता घटाने और समाज के सभी वर्गों को विकास प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर दिया।

उन्होंने कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई। मंत्री के मुताबिक, गांवों में रहने वाली बड़ी आबादी और बारिश पर निर्भर खेती को देखते हुए सिंचाई, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन तथा पशुपालन के लिए अधिक वित्तीय सहायता जरूरी है। इसके साथ ही स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में पर्याप्त संसाधन लगाने को भी विकसित भारत की मजबूत नींव के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

सम्मेलन में वित्त मंत्री ने झारखंड की वित्तीय स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य नीति आयोग की ‘अचीवर’ श्रेणी में शामिल है। उन्होंने राज्य के राजस्व संग्रह को मजबूत, राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में और पूंजीगत व्यय को उच्च स्तर पर बताया। बैठक में झारखंड के वित्त सचिव प्रशांत कुमार समेत राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।