मेदिनीनगर: झारखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस काउंसलिंग के बाद लॉक की गई सीट छोड़ना अब विद्यार्थियों को महंगा पड़ सकता है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सीट स्वीकार करने और नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पीछे हटने वाले विद्यार्थी को 20 लाख रुपये जुर्माना देना होगा। मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज सहित राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नामांकन के समय इस संबंध में सहमति पत्र भी भरवाया जा रहा है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य काउंसलिंग के बाद सीट खाली रहने की स्थिति को रोकना है। किसी विद्यार्थी द्वारा सीट लॉक करने के बाद नामांकन छोड़ने पर वह स्थान दूसरे अभ्यर्थी के लिए उपलब्ध नहीं रह सकता। ऐसी स्थिति में संबंधित शैक्षणिक सत्र के दौरान मेडिकल की सीट रिक्त रहने की आशंका बन जाती है।
मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज के नामांकन सेल के प्रमुख डॉ. अतुल प्रकाश के अनुसार, नामांकन की सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद सीट छोड़ना नियमों के अनुरूप नहीं है। विद्यार्थियों को प्रवेश प्रक्रिया के दौरान नए प्रावधान की जानकारी दी जा रही है, ताकि वे सीट स्वीकार करने से पहले अपना निर्णय सावधानी से लें।
मेडिकल कॉलेजों में सीमित सीटों के कारण किसी एक स्थान का खाली रहना प्रतीक्षा कर रहे दूसरे अभ्यर्थी के अवसर को भी प्रभावित कर सकता है। जुर्माने के प्रावधान के जरिए विद्यार्थियों को काउंसलिंग और सीट लॉक करने से पहले उपलब्ध विकल्पों पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित करने की कोशिश की गई है।
मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज में नए एमबीबीएस सत्र के लिए राज्य कोटे की 83 सीटें निर्धारित हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि इनमें 73 सीटों पर नामांकन पूरा हो चुका है। राज्य कोटे के पहले चरण की नामांकन प्रक्रिया शुक्रवार को समाप्त हुई।
कॉलेज में अखिल भारतीय कोटे की कुल 15 सीटें हैं। पहले चरण की समाप्ति तक इनमें छह विद्यार्थियों ने नामांकन नहीं लिया था। अब इन रिक्त स्थानों पर दूसरे चरण में विद्यार्थियों के पहुंचने की संभावना जताई गई है। अभ्यर्थियों के लिए जरूरी होगा कि वे सीट लॉक करने और सहमति पत्र भरने से पहले प्रवेश की शर्तों को ठीक तरह से समझ लें।