सरकारी रिपोर्ट: झारखंड के 283 गांवों के पानी में फ्लोराइड अधिक, पलामू में स्थिति सबसे गंभीर

जनवरी-मार्च 2026 की एनपीपीसीएफ रिपोर्ट में सात जिलों के 283 गांवों में फ्लोराइड की अधिकता सामने आई है। पलामू के 137 नमूनों में 89 में स्तर एक मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक मिला।

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झारखंड में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। भारत सरकार के नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ फ्लोरोसिस की जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के सात जिलों के 283 गांवों के पानी में फ्लोराइड की अधिकता दर्ज की गई है। स्कूलों में हुई जांच के दौरान बच्चों में डेंटल फ्लोरोसिस के संदिग्ध और पुष्ट मामले भी मिले हैं।

रिपोर्ट में पलामू की स्थिति राज्य में सबसे गंभीर बताई गई है। जिले में जांचे गए 137 जल नमूनों में से 89, यानी करीब 65 प्रतिशत नमूनों में फ्लोराइड का स्तर एक मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक पाया गया। गढ़वा में 132 में से 44, साहिबगंज में 750 में से 153 और हजारीबाग में 195 में से 20 नमूने इस स्तर से ऊपर मिले। गोड्डा के 23 नमूनों में से दो में भी फ्लोराइड अधिक था।

बच्चों की स्क्रीनिंग के आंकड़ों में रामगढ़ में 2,826 बच्चों की जांच के बाद 412 संदिग्ध मामले सामने आए, जिनमें 221 की पुष्टि हुई। साहिबगंज में 54,214 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई और 1,369 संदिग्ध मामले मिले। गोड्डा में जांचे गए 410 बच्चों में 108 संदिग्ध पाए गए, जबकि 14 मामलों की पुष्टि हुई।

सामुदायिक स्तर की जांच में भी स्वास्थ्य संबंधी संकेत दर्ज किए गए हैं। रामगढ़ में 934 लोगों की जांच में डेंटल फ्लोरोसिस के 76 संदिग्ध मामले मिले और चार की पुष्टि हुई। गोड्डा में चार लोगों में स्केलेटल फ्लोरोसिस का संदेह सामने आया। रिपोर्ट में रामगढ़ के 20 जलस्रोतों को अनुपयुक्त घोषित करने और 15 सुरक्षित जलस्रोत उपलब्ध कराने की बात भी दर्ज है।

एनपीपीसीएफ के तहत झारखंड के 24 में से 13 जिले फ्लोराइड की समस्या वाले माने गए हैं। इनमें चतरा, धनबाद, गढ़वा, गिरिडीह, गोड्डा, हजारीबाग, जामताड़ा, पाकुड़, पलामू, रामगढ़, रांची, साहिबगंज और सिमडेगा शामिल हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड के प्री-मानसून 2024 के आंकड़ों में राज्य के 138 नमूनों में नौ नमूने अधिकतम अनुमेय सीमा से ऊपर पाए गए थे।

भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार पेयजल में फ्लोराइड की वांछनीय सीमा एक मिलीग्राम प्रति लीटर और अधिकतम अनुमेय सीमा 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर है। इससे अधिक फ्लोराइड वाला पानी लगातार पीने योग्य नहीं माना जाता। अधिक मात्रा के लंबे सेवन से दांतों का रंग बदलने के साथ हड्डियों और जोड़ों में दर्द या अकड़न जैसी समस्याएं हो सकती हैं।