सरायकेला जिला प्रशासन ने औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रतिष्ठानों की जिम्मेदारी तय करने का आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक, किसी प्रतिष्ठान के बाहर अनधिकृत रूप से खड़े वाहन के कारण दुर्घटना होने पर संबंधित कंपनी और उसके प्रबंधन को सीधे जवाबदेह माना जाएगा। ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
प्रशासन ने कहा है कि सड़कों पर खड़े वाहनों से जुड़ी समस्या की जिम्मेदारी केवल ट्रांसपोर्टर पर नहीं डाली जा सकती। अब मुख्य जिम्मेदारी उस औद्योगिक प्रतिष्ठान की मानी जाएगी, जिसके बाहर वाहन अनधिकृत तरीके से खड़े पाए जाएंगे। सभी प्रतिष्ठानों को आदेश का सख्ती से पालन करने के लिए कहा गया है।
आदेश का उद्देश्य औद्योगिक इलाकों में संभावित दुर्घटनाओं को रोकना और वाहनों की आवाजाही को सुचारू बनाना है। प्रशासन ने अनुपालन नहीं करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया है। चेतावनी में संबंधित प्लांट को बंद कराने तक की कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।
जिला प्रशासन ने कुछ संभावित दुर्घटना स्थलों की पहचान भी की है। इनमें रामकृष्ण फोर्जिंग्स लिमिटेड के आसपास का क्षेत्र और कांड्रा टोल बूथ शामिल हैं। कांड्रा-चौका मार्ग पर अमलगम कंपनी के निकट का हिस्सा भी प्रशासन की सूची में है, जहां सड़क किनारे वाहनों की पार्किंग पर विशेष निगरानी की जरूरत बताई गई है।
इसके अलावा एनएच-33 फोरलेन पर पाटा टोल प्लाजा और आसनबनी तथा एनएच-18 के चांडिल-पुरुलिया मार्ग पर भालूकोचा को भी संभावित दुर्घटना वाले स्थानों में रखा गया है। नए निर्देश के बाद औद्योगिक प्रतिष्ठानों को अपने परिसर से जुड़े वाहनों की पार्किंग व्यवस्था संभालनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि सड़क पर खड़े वाहन यातायात या जनसुरक्षा के लिए खतरा न बनें।