साहिबगंज जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के उद्देश्य से अलग जाति और निवास प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया रोक दी गई है। यह कदम राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार की आपत्ति के बाद उठाया गया। जिले के विभिन्न प्रखंडों में इस तरह के दो हजार से अधिक प्रमाणपत्र पहले ही जारी किए जाने की बात सामने आई है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से कुछ दस्तावेज एसआईआर से जुड़ी सुनवाई के दौरान जमा भी किए जा चुके हैं। पहले जारी प्रमाणपत्रों की वैधता पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उनका सत्यापन जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त के स्तर पर होना बाकी है। दस्तावेज अमान्य पाए जाने पर संबंधित आवेदकों से दूसरा प्रमाणपत्र मांगा जा सकता है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी शनिवार को कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मतदाता बनने की कोशिश से जुड़ी शिकायतों की जांच के लिए साहिबगंज पहुंचे थे। जांच के दौरान उन्होंने चार मतदाताओं और दस्तावेज तैयार करने वाले एक कॉमन सर्विस सेंटर संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया। इसी क्रम में केवल एसआईआर के लिए विशेष प्रमाणपत्र बनाए जाने का मामला सामने आया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रमाणपत्रों का प्रारूप प्रखंडों में एक जैसा नहीं था। राजमहल और उधवा समेत कुछ क्षेत्रों में दस्तावेज पर एसआईआर का उल्लेख किया गया, जबकि बरहड़वा में प्रमाणपत्र के बजाय संबंधित कर्मचारी की रिपोर्ट में इसका जिक्र था। इन प्रमाणपत्रों की वैधता तीन महीने निर्धारित की गई थी और दूसरे कार्यों में इनके इस्तेमाल की अनुमति नहीं थी।
जाति और निवास प्रमाणपत्रों के बड़ी संख्या में लंबित ऑनलाइन आवेदनों के बीच राज्य सरकार ने हाल में ऑफलाइन प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, आदेश के साथ कोई निर्धारित प्रारूप नहीं भेजे जाने के कारण अंचल अधिकारियों ने अपने स्तर से प्रारूप तैयार किए। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की आपत्ति के बाद अब साहिबगंज में यह व्यवस्था बंद कर दी गई है।
साहिबगंज में जाति प्रमाणपत्र के 86,942 और निवास प्रमाणपत्र के 80,417 ऑनलाइन आवेदन लंबित बताए गए हैं। इनके अलावा ऑफलाइन आवेदन भी आए हैं। ऐसे में प्रशासन के अगले निर्देश और पहले से जारी दस्तावेजों के सत्यापन का इंतजार है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि एसआईआर की सुनवाई में ऐसे प्रमाणपत्र दे चुके आवेदकों को नए दस्तावेज जमा करने होंगे या नहीं।