सितंबर में झारखंड को कोयला कंपनियों से मिले 8,900.17 करोड़ रुपये

सितंबर 2026 में कोयला कंपनियों के कुल सरकारी भुगतान में झारखंड की हिस्सेदारी 41.94 प्रतिशत रही। राज्य को रॉयल्टी में 2,674.92 करोड़ और डीएमएफ में 790.50 करोड़ रुपये मिले।

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धनबाद से सामने आए सितंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, कोयला कंपनियों ने केंद्र और राज्य सरकारों को विभिन्न मदों में कुल 21,220.60 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इसमें झारखंड को 8,900.17 करोड़ रुपये मिले। कुल भुगतान में राज्य की हिस्सेदारी 41.94 प्रतिशत रही, जो सूची में शामिल सभी राज्यों से अधिक है।

ये भुगतान रॉयल्टी, जिला खनिज फाउंडेशन, राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट, वस्तु एवं सेवा कर, कोयले पर उपकर और अन्य मदों के अंतर्गत किए गए। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, झारखंड को सितंबर में मिली राशि को रिकॉर्ड भुगतान बताया गया है। प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य होने के कारण यह राशि झारखंड के सरकारी राजस्व के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

राज्यवार आंकड़ों में मध्य प्रदेश 3,465.17 करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर रहा। ओडिशा को 2,811.47 करोड़, छत्तीसगढ़ को 2,206.58 करोड़ और पश्चिम बंगाल को 1,860.04 करोड़ रुपये मिले। महाराष्ट्र के हिस्से में 1,765.55 करोड़ रुपये आए। उत्तर प्रदेश को 197.62 करोड़ और असम को 13.92 करोड़ रुपये का भुगतान दर्ज किया गया।

प्रतिशत के आधार पर मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 16.33 प्रतिशत और ओडिशा की 13.25 प्रतिशत रही। छत्तीसगढ़ को कुल भुगतान का 10.40 प्रतिशत मिला, जबकि पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की हिस्सेदारी क्रमशः 8.77 प्रतिशत और 8.32 प्रतिशत दर्ज की गई। इन आंकड़ों में झारखंड का हिस्सा अन्य राज्यों की तुलना में स्पष्ट रूप से सबसे बड़ा रहा।

रॉयल्टी मद में सभी राज्यों को मिलाकर 7,800.25 करोड़ रुपये दिए गए। इसमें झारखंड को सर्वाधिक 2,674.92 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। ओडिशा को 1,640.47 करोड़, मध्य प्रदेश को 1,524.64 करोड़, महाराष्ट्र को 963.84 करोड़ और छत्तीसगढ़ को 902.39 करोड़ रुपये मिले।

जिला खनिज फाउंडेशन के तहत भी झारखंड को 790.50 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ। इसी मद में ओडिशा को 468.93 करोड़, मध्य प्रदेश को 459.56 करोड़ और छत्तीसगढ़ को 379.18 करोड़ रुपये मिले। सितंबर के समग्र आंकड़े कोयला आधारित भुगतानों में झारखंड की बड़ी हिस्सेदारी को रेखांकित करते हैं।