सिमडेगा के भलमंडा टांगरटोली में 36 किसानों ने सीखी मशरूम उत्पादन की तकनीक

कुरडेग प्रखंड में पांच दिवसीय प्रशिक्षण पूरा करने वाले 36 किसानों को प्रमाणपत्र दिए गए। प्रत्येक प्रतिभागी को मशरूम उत्पादन शुरू करने के लिए 30 किट उपलब्ध कराई जाएंगी।

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भलमंडा टांगरटोली में मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण के बाद प्रमाणपत्र प्राप्त करते किसान

सिमडेगा जिले के कुरडेग प्रखंड में ग्रामीण किसानों को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से पांच दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण आयोजित किया गया। गरियाजोर पंचायत के भलमंडा टांगरटोली गांव में हुए इस कार्यक्रम में आदिम जनजाति कोरवा और अनुसूचित जनजाति समुदायों सहित कुल 36 किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण उद्यान विभाग की उद्यान विकास योजना के तहत संचालित किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक और व्यावहारिक विधियों की जानकारी दी गई। उन्हें उपयुक्त प्रजाति के चयन, स्पॉन के इस्तेमाल और उत्पादन इकाई तैयार करने की प्रक्रिया समझाई गई। किसानों के सामने उत्पादन की व्यावहारिक विधि का प्रदर्शन भी किया गया, ताकि वे सीखी गई तकनीक को स्थानीय स्तर पर अपना सकें।

कार्यक्रम में तापमान और नमी के प्रबंधन पर विशेष जानकारी दी गई। इसके साथ ही रोग एवं कीट नियंत्रण, तैयार मशरूम की तुड़ाई, रख-रखाव और विपणन से जुड़े पहलुओं को भी प्रशिक्षण में शामिल किया गया। इसका उद्देश्य किसानों को उत्पादन शुरू करने से लेकर उपज के प्रबंधन तक की जरूरी समझ देना था।

जिला उद्यान पदाधिकारी माधुरी टोप्पो ने बताया कि मशरूम उत्पादन कम लागत और सीमित स्थान में शुरू किया जा सकता है। उन्होंने इसे ग्रामीण एवं जनजातीय परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बताते हुए किसानों से प्रशिक्षण में मिली जानकारी को व्यवहार में उतारने और इसे स्वरोजगार के रूप में विकसित करने की अपील की।

प्रशिक्षण के दौरान कृषि और उद्यान विभाग की विभिन्न विकास योजनाओं की जानकारी भी दी गई। जिला परिषद उपाध्यक्ष सोनी पैकरा और गरियाजोर पंचायत की मुखिया प्रतिभा कुजूर ने किसानों को योजनाओं का लाभ लेकर आय बढ़ाने तथा स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

पांच दिवसीय कार्यक्रम के समापन पर सभी 36 प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाणपत्र सौंपे गए। विभाग की ओर से प्रत्येक किसान को 30 मशरूम उत्पादन किट उपलब्ध कराने की तैयारी है। इन किट की सहायता से किसान अपने घर और आसपास मौजूद संसाधनों का उपयोग करके उत्पादन शुरू कर सकेंगे। कार्यक्रम का घोषित लक्ष्य तकनीकी प्रशिक्षण के जरिए ग्रामीण किसानों की आमदनी बढ़ाने के अवसर तैयार करना है।