सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड स्थित मड़की टोली में सड़क का अभाव एक किशोरी के उपचार में बड़ी बाधा बन गया। मंगलवार को 14 वर्षीय सुषमा मड़की के अचेत होने पर गांव तक वाहन नहीं पहुंच सका। इसके बाद ग्रामीणों ने चटाई को अस्थायी स्ट्रेचर बनाकर उसे खेत की पगडंडी से मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां से किशोरी को ऑटो से अस्पताल ले जाया गया।
परिजनों के मुताबिक, गणेश पूजा की छुट्टी में मामा के घर से लौटने के बाद सुषमा अचानक गिर गई और पीढ़े से टकराकर अचेत हो गई। काफी समय तक होश नहीं आने पर परिवार के लोग घबरा गए और ग्रामीणों से सहायता मांगी। गांव में सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस या कोई दूसरा वाहन घर तक पहुंचाना संभव नहीं था।
ग्रामीणों ने तत्काल चटाई की मदद से किशोरी को उठाया और पगडंडी से करीब एक किलोमीटर दूर मुख्य सड़क की ओर ले गए। मुख्य सड़क पर पहुंचने के बाद ऑटो की व्यवस्था कर उसे अस्पताल भेजा गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उपचार के बाद किशोरी की स्थिति ठीक बताई गई है।
पतिअम्बा पंचायत के इस आदिवासी बहुल गांव में करीब 50 परिवार रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत मुख्यालय से लगभग एक किलोमीटर दूर होने के बावजूद मड़की टोली तक पक्की सड़क नहीं बनी है। इस कारण बीमारी या किसी अन्य आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाना कठिन हो जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में जलमीनार स्थापित की गई है, लेकिन वह चालू नहीं है। आंगनबाड़ी केंद्र भी शुरू नहीं हुआ है। उनका कहना है कि सड़क के साथ पेयजल और बच्चों से जुड़ी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं होने से गांव के परिवारों को नियमित रूप से परेशानी झेलनी पड़ती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मड़की टोली तक जल्द सड़क बनाने तथा जलमीनार और आंगनबाड़ी केंद्र को चालू कराने की मांग की है। घटना ने खासकर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा तक गांव की पहुंच का सवाल सामने रखा है, क्योंकि सड़क के अभाव में मरीज को पहले पगडंडी पार कर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है।