सिमडेगा में खाद्य सुरक्षा विभाग ने दूध और दूसरे खाद्य पदार्थों में संभावित मिलावट को लेकर लोगों को सतर्क किया है। उपायुक्त कंचन सिंह के निर्देश पर विभाग गुणवत्ता जांच के साथ उपभोक्ताओं को यह जानकारी दे रहा है कि खरीदारी के समय किन बातों का ध्यान रखा जाए और संदेह होने पर विभाग को सूचना दी जाए।
खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी विकास कुमार के अनुसार, विभाग मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए निगरानी कर रहा है। उन्होंने बताया कि दूध में डिटर्जेंट या अन्य रसायन मिलाए जाने की स्थिति स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है। लोगों को खुले और संदिग्ध स्रोतों से खाद्य सामग्री नहीं खरीदने की सलाह दी गई है।
विभाग ने दूध की शुरुआती घरेलू जांच का एक तरीका भी साझा किया। इसके तहत कांच की शीशी में पांच से दस मिलीलीटर दूध लेकर उतनी ही मात्रा में पानी मिलाया जा सकता है। शीशी को 20 से 30 सेकंड तक जोर से हिलाने पर बहुत गाढ़ा और देर तक टिकने वाला झाग दिखाई दे, तो मिलावट की आशंका हो सकती है।
हालांकि खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि ऐसी घरेलू जांच किसी मिलावट की अंतिम पुष्टि नहीं करती। यह केवल प्रारंभिक संकेत दे सकती है। दूध या किसी अन्य खाद्य पदार्थ की वास्तविक गुणवत्ता और मिलावट की विश्वसनीय पुष्टि एफएसएसएआई से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की जांच से ही संभव है।
पैकेट वाला दूध खरीदने से पहले उसकी सील, पैकिंग की तारीख, एक्सपायरी डेट और बैच नंबर देखने को कहा गया है। पैकेट फूला हुआ, लीक या क्षतिग्रस्त मिले तो उसे नहीं खरीदना चाहिए। घर लाने के बाद दूध को तुरंत फ्रिज में रखने और पैकेट पर दिए तापमान संबंधी निर्देशों का पालन करने की सलाह भी दी गई है।
दूध खोलने के बाद उसकी गंध, रंग और बनावट में बदलाव पर ध्यान देने को कहा गया है। खट्टी गंध, असामान्य रंग या फटने जैसी स्थिति में उसका सेवन नहीं करने की सलाह है। विभाग ने कहा कि खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह होने पर इसकी सूचना खाद्य सुरक्षा विभाग को दी जा सकती है।