रांची जिले के गांवों में स्थानीय पशुधन और कुक्कुट की विशिष्ट आबादी की वैज्ञानिक पहचान के लिए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की टीम ने सर्वेक्षण तेज किया है। वैज्ञानिकों ने सोनाहातू प्रखंड के सेरेंगहातु तथा राहे प्रखंड के गोवाली और बरवाडीह गांवों में पशुपालकों से जानकारी एवं आवश्यक आंकड़े जुटाए हैं। इसका उद्देश्य अब तक गैर-वर्णित और गैर-चिह्नित पशु आबादी का दस्तावेजीकरण कर उपयुक्त नस्लों को पंजीकरण के लिए प्रस्तुत करना है।
यह अभियान वर्ष 2024 में शुरू हुआ था और बीएयू के पशु आनुवंशिक संसाधन अनुसंधान केंद्र के माध्यम से चलाया जा रहा है। विश्वविद्यालय की टीम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से वित्तपोषित ‘नेटवर्क परियोजना ऑन एनिमल जेनेटिक रिसोर्सेज’ के तहत काम कर रही है। यह पहल आईसीएआर के राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, करनाल से जुड़ी है।
टीम राहे और बुंडू प्रखंडों में आधारभूत सर्वेक्षण तथा मानचित्रण पहले ही पूरा कर चुकी है। नए सर्वेक्षण में वैज्ञानिकों ने घर-घर जाकर पशुपालकों से स्थानीय पशुओं की विशेषताओं से संबंधित विवरण एकत्र किए। पूर्व के दौरे में गोवाली, गोंदा और डोकाद गांवों में प्रचलित पारंपरिक पशु चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी भी दर्ज की गई थी।
परियोजना की प्रधान अन्वेषक डॉ. नंदनी कुमारी के अनुसार, दल को सर्वेक्षण के दौरान नदी, दुर्गम पहाड़ी रास्तों और हाथियों की मौजूदगी वाले वन क्षेत्रों से गुजरना पड़ा। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद टीम ने स्थानीय पशु संसाधनों की पहचान और संरक्षण के उद्देश्य से अभियान जारी रखा। पशुपालकों के बीच उच्च गुणवत्ता वाला खनिज मिश्रण भी वितरित किया गया।
सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह और डॉ. शैलेन्द्र कुमार रजक ने औपचारिक नस्ल पंजीकरण को वैज्ञानिक संरक्षण के लिए जरूरी बताया है। उनके मुताबिक, आधिकारिक पहचान से स्थानीय पशुओं की आनुवंशिक विविधता, प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता और उनके विशिष्ट गुणों को संरक्षित करने में सहायता मिल सकती है।
बीएयू ने झारखंड को ‘जीरो नॉन-डिस्क्रिप्ट जोन’ बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत पारंपरिक पशुधन और कुक्कुट के साथ स्थानीय कुत्तों की आबादी को भी अध्ययन में शामिल किया गया है। विश्वविद्यालय की टीम दो अन्य जिलों में भी सर्वेक्षण और आंकड़ा-संकलन करेगी, जिसके बाद पहचान योग्य आबादी को नस्ल पंजीकरण की प्रक्रिया के लिए आगे बढ़ाया जाएगा।