हजारीबाग जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के कई प्लस टू विद्यालयों में पदस्थापित शिक्षकों को शहरी क्षेत्र के चुनिंदा स्कूलों में सेवा के लिए भेजा गया है। इससे गांवों के विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की कमी और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की स्थिति सामने आई है।
बताया गया है कि ग्रामीण क्षेत्र के 50 से अधिक शिक्षक फिलहाल शहरी विद्यालयों में प्रतिनियुक्त हैं। ये शिक्षक कक्षा नौवीं से बारहवीं तक पढ़ाने वाले हैं। प्लस टू विद्यालयों के शिक्षक राज्य कैडर के होते हैं और उनकी प्रतिनियुक्ति माध्यमिक शिक्षा निदेशक के अधीन की जाती है। संबंधित आदेश जारी होने के बाद ग्रामीण स्कूलों के शिक्षकों को शहर के विद्यालयों में भेजा गया था।
मुख्यमंत्री उत्कृष्ट गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल में कार्यरत 39 शिक्षकों में 17 के प्रतिनियुक्ति पर होने की जानकारी दी गई है। इनमें पांच पीजीटी और 12 टीजीटी शिक्षक शामिल हैं। इन शिक्षकों का मूल पदस्थापन हजारीबाग के डाड़ी, विष्णुगढ़, टाटीझरिया, चलकुसा और दारू जैसे प्रखंडों के विद्यालयों में बताया गया है। एक शिक्षक का मूल पदस्थापन चतरा जिले में है।
विष्णुगढ़ प्रखंड के उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालय सारूकुदर का उदाहरण भी सामने रखा गया है। विद्यालय में 700 से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं, जबकि गणित के शिक्षक को वर्ष 2022 से शहरी क्षेत्र में प्रतिनियुक्त बताया गया है। इसके कारण वहां गणित विषय की पढ़ाई प्रभावित होने की बात कही गई है।
इसी तरह कोडरमा के उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालय डूमरडीहा में पदस्थापित जीव विज्ञान के शिक्षक के वर्ष 2024 से हजारीबाग के मुख्यमंत्री उत्कृष्ट गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल में प्रतिनियुक्त होने की जानकारी है। हिन्दू प्लस टू उच्च विद्यालय में मूल रूप से पदस्थापित भौतिकी के शिक्षक को भी वर्ष 2022 से अन्य विद्यालयों में सेवा देने के लिए लगाए जाने का उल्लेख किया गया है।
इन उदाहरणों के बाद यह प्रश्न सामने आया है कि शहरी स्कूलों की जरूरत पूरी करते समय ग्रामीण विद्यालयों में विषयवार पढ़ाई की निरंतरता कैसे सुनिश्चित की जा रही है। उपलब्ध विवरण में शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया या प्रतिनियुक्तियों में बदलाव से संबंधित किसी निर्णय का उल्लेख नहीं है। फिलहाल रिपोर्ट ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और प्रतिनियुक्ति व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत की ओर ध्यान खींचती है।