1995 के रिश्वत मामले में पूर्व रेलकर्मी की दोषसिद्धि बरकरार, सजा घटाकर एक वर्ष

झारखंड हाईकोर्ट ने हटिया स्टेशन के पूर्व पार्सल क्लर्क की दोषसिद्धि कायम रखी। उम्र, स्वास्थ्य और लंबी न्यायिक प्रक्रिया को देखते हुए कारावास की अवधि घटाई गई है।

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झारखंड उच्च न्यायालय से जुड़ी 1995 के रिश्वत मामले की खबर

रांची में झारखंड उच्च न्यायालय ने वर्ष 1995 के रिश्वत मामले में हटिया रेलवे स्टेशन के पूर्व पार्सल क्लर्क काली शंकर धोबी की दोषसिद्धि बरकरार रखी है। अदालत ने हालांकि उनकी वर्तमान उम्र, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और करीब 31 वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया पर विचार करते हुए कारावास की अवधि घटाकर एक वर्ष कर दी।

मामला 27 अप्रैल 1995 का है। उस समय काली शंकर धोबी हटिया रेलवे स्टेशन पर पार्सल क्लर्क के रूप में कार्यरत थे। उपलब्ध विवरण के अनुसार, निर्मल कुमार बेगानी अपनी मोटरसाइकिल बिहार के समस्तीपुर भेजना चाहते थे। इसी काम के बदले उनसे 100 रुपये की रिश्वत मांगे जाने की शिकायत की गई थी।

शिकायत केंद्रीय जांच ब्यूरो को दी गई थी। इसके बाद जांच एजेंसी ने कार्रवाई की और पूर्व रेलकर्मी को 100 रुपये लेते हुए पकड़ा था। मामले में चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद उन्हें दोषी ठहराया गया। दोषसिद्धि को चुनौती दिए जाने पर प्रकरण झारखंड उच्च न्यायालय के समक्ष पहुंचा।

उच्च न्यायालय ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर दोषसिद्धि में हस्तक्षेप नहीं किया। अदालत ने संबंधित प्रावधानों के तहत छह महीने और एक वर्ष के कारावास की अवधि निर्धारित की है। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी, इसलिए दोषी को कुल एक वर्ष जेल में बिताना होगा।

सजा की अवधि पर निर्णय करते समय अदालत ने पूर्व रेलकर्मी की आयु 75 वर्ष होने, उनकी स्वास्थ्य समस्याओं और मुकदमे के लंबे समय तक लंबित रहने का संज्ञान लिया। इन परिस्थितियों के आधार पर कारावास की अवधि में कमी की गई, लेकिन रिश्वत मामले में दर्ज दोषसिद्धि को यथावत रखा गया।

अदालत ने उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी है। साथ ही उन्हें दो महीने के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया है। इस आदेश के बाद तीन दशक से अधिक पुराने मामले में दोषसिद्धि कायम रहते हुए सजा की अंतिम अवधि एक वर्ष निर्धारित हो गई है।