गढ़वा जिले में अगस्त के दौरान हुई अच्छी बारिश से धान की खेती को बड़ी राहत मिली है। एक अगस्त तक जिले में निर्धारित लक्ष्य के केवल 4.27 प्रतिशत क्षेत्र में धान की रोपनी हो सकी थी। अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब 85 प्रतिशत पहुंच गया है। खेतों में पानी और पर्याप्त नमी मिलने के बाद किसानों ने रोपनी का काम तेजी से आगे बढ़ाया।
खरीफ मौसम की शुरुआत में बारिश की कमी के कारण खेती पिछड़ गई थी। जून में जिले में केवल 15.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जुलाई में 212.7 मिलीमीटर बारिश हुई, लेकिन धान की खेती की जरूरत के लिहाज से स्थिति पर्याप्त नहीं बनी। नौ अगस्त तक रोपनी 12.18 प्रतिशत और 13 अगस्त तक करीब 31 प्रतिशत क्षेत्र में पहुंच सकी थी।
अगस्त के दूसरे और तीसरे सप्ताह में बारिश तेज होने के बाद खेती की स्थिति तेजी से बदली। खेतों में पानी जमा हुआ और मिट्टी में नमी बढ़ी तो किसानों ने रोपनी की रफ्तार बढ़ा दी। इसके बाद रोपनी का स्तर करीब 31 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 85 प्रतिशत हो गया। महीने भर में दर्ज इस बढ़ोतरी से खरीफ फसल को लेकर किसानों की उम्मीद फिर मजबूत हुई है।
जिला कृषि पदाधिकारी खुशबू पासवान के अनुसार, प्रखंडों से मिली जानकारी में जिले की करीब 85 प्रतिशत धान रोपनी पूरी होने की बात सामने आई है। उन्होंने लगभग सभी प्रखंडों की स्थिति को संतोषजनक बताया। मझिआंव प्रखंड में करीब 80 प्रतिशत रोपनी होने की जानकारी मिली है, जबकि अन्य प्रखंडों में किसान बचे हुए खेतों में काम पूरा करने में जुटे हैं।
जिले में इस खरीफ मौसम के दौरान करीब 1.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान आच्छादन का लक्ष्य रखा गया है। शुरुआती महीनों में कम बारिश के कारण इस लक्ष्य तक पहुंचना कठिन दिखाई दे रहा था। अगस्त की वर्षा ने स्थिति काफी हद तक संभाल दी और अधिकांश खेतों में अब धान की हरियाली दिखाई देने लगी है।
हालांकि, देर से हुई रोपनी अब भी एक चुनौती है। देर से लगाए गए धान को तैयार होने के लिए अपेक्षाकृत कम समय मिलेगा। पूरी तरह वर्षा पर निर्भर ऊंचे खेतों को भी आगे पर्याप्त पानी की जरूरत है। अब किसानों की निगाह सितंबर के मौसम पर है, क्योंकि पर्याप्त बारिश से फसल को जरूरी नमी मिलती रहेगी और संभावित उत्पादन नुकसान कम हो सकेगा।