रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने एकीकृत बिहार के समय सामने आए अलकतरा घोटाले की सुनवाई करीब तीन दशक बाद भी पूरी नहीं होने पर गंभीर नाराजगी जताई है। जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस राम शर्मा की खंडपीठ ने सीबीआई से मुकदमे के शीघ्र निष्पादन के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है।
अदालत के समक्ष रखी गई जानकारी के अनुसार, इस मामले में कुल 32 आरोपी थे। सुनवाई की लंबी अवधि के दौरान इनमें से 12 आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि शेष 20 लोगों के विरुद्ध मुकदमा अब भी चल रहा है। खंडपीठ ने इतनी लंबी अवधि तक मामला लंबित रहने को चिंता का विषय माना।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीआई की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। खंडपीठ ने कहा कि एजेंसी दस्तावेज जुटाने में काफी समय लगा देती है, लेकिन गवाहों को अदालत में पेश करने की प्रक्रिया में अपेक्षित तेजी दिखाई नहीं देती। सीबीआई की ओर से बताया गया कि कई मामलों में गवाह अपने दर्ज पते पर नहीं मिल रहे हैं।
हाईकोर्ट सांसदों और विधायकों से संबंधित आपराधिक मुकदमों की प्रगति की निगरानी कर रहा है। इसी क्रम में अदालत ने लंबित 11 मामलों में से दो के रिकॉर्ड निचली अदालत से मंगाने का निर्देश दिया। इन रिकॉर्ड के आधार पर मामलों की स्थिति और सुनवाई की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
यह निगरानी सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश की पृष्ठभूमि में हो रही है, जिसमें जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का तेजी से निपटारा करने को कहा गया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की और संबंधित मामलों की नियमित समीक्षा शुरू की।
अलकतरा घोटाला वर्ष 1997 का है। जांच के बाद सीबीआई ने तत्कालीन पथ निर्माण मंत्री इलियास हुसैन सहित 32 आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया था। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद एजेंसी को लंबित सुनवाई आगे बढ़ाने और गवाहों की पेशी सहित आवश्यक प्रक्रियाओं में तेजी लानी होगी।