रांची स्थित बैंक ऑफ इंडिया की क्लबसाइड शाखा से जुड़े ऋण खाते में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने प्राथमिकी दर्ज की है। मामला नटराज राइस मिल्स प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व निदेशकों, कई नामजद लोगों और संबंधित कंपनियों से जुड़ा है। आरोप है कि इन गतिविधियों से सरकारी बैंक को 19.30 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीबीआई की कोलकाता स्थित आर्थिक अपराध शाखा ने जांच शुरू की है। इसके दायरे में ऋण की कॉरपोरेट गारंटर कंपनियां भी हैं। एजेंसी अज्ञात लोक सेवकों और बैंक कर्मियों की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही है। प्राथमिकी में लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं।
कोलकाता में पंजीकृत कंपनी बिहार के लखीसराय जिले के डकरा में राइस मिल संचालित करती थी। कंपनी को 2013 से 2025 के बीच बैंक से कुल 20.43 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा मिली थी। इसमें 17 करोड़ रुपये का नकद ऋण और 3.43 करोड़ रुपये का कार्यशील पूंजी सावधि ऋण शामिल था।
यह वित्तीय सुविधा धान खरीदने, चावल तैयार करने और उसकी थोक आपूर्ति के लिए स्वीकृत की गई थी। आरोप है कि ऋण राशि को तय कारोबारी काम में लगाने के बजाय सहयोगी और संबंधित कंपनियों के खातों में भेजा गया। भुगतान लंबित रहने पर बैंक ने 24 जून 2025 को खाते को 19.30 करोड़ रुपये के बकाये के साथ गैर-निष्पादित परिसंपत्ति घोषित किया था।
फॉरेंसिक ऑडिट में नोटबंदी के समय कंपनी के नकद लेन-देन पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में 8 नवंबर 2016 को 1.09 करोड़ रुपये का नकद शेष दर्ज होने और उसमें से 1.01 करोड़ रुपये पुराने 500 तथा 1000 रुपये के नोटों में होने का उल्लेख है। जांच एजेंसी इस राशि को बैंक खातों में जमा कराने से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
ऑडिट रिपोर्ट में कंपनी के अल्पकालीन ऋण और अग्रिम में वृद्धि का भी उल्लेख किया गया है। यह राशि वित्त वर्ष 2016-17 के 45 लाख रुपये से बढ़कर 2022-23 में 23.83 करोड़ रुपये हो गई थी। आरोप है कि इसका बड़ा हिस्सा निदेशकों और संबंधित पक्षों तक पहुंचा तथा कुछ लेन-देन ऑडिटेड बैलेंस शीट में पूरी तरह प्रदर्शित नहीं किए गए। इन सभी बिंदुओं पर अंतिम निष्कर्ष सीबीआई की जांच के बाद ही सामने आएगा।