जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड की मांग को लेकर नई दिल्ली में 29 और 30 अगस्त को दो दिवसीय राष्ट्रीय धार्मिक सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन में भाग लेने के लिए जमशेदपुर सहित कोल्हान क्षेत्र के आदिवासी संगठनों का प्रतिनिधिमंडल टाटानगर रेलवे स्टेशन से दिल्ली के लिए रवाना हुआ है।
प्रतिनिधिमंडल में मानकी मुंडा संघ, आदिवासी हो समाज युवा महासभा और आदिवासी उरांव समाज संघ से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हैं। वे सम्मेलन में आदिवासी समुदाय की सामाजिक और धार्मिक पहचान से संबंधित विषयों पर होने वाले राष्ट्रीय स्तर के विचार-विमर्श में हिस्सा लेंगे।
दिल्ली के झांसी रोड स्थित आंबेडकर भवन में प्रस्तावित इस सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों और प्रबुद्धजनों के जुटने की जानकारी दी गई है। बैठक का मुख्य विषय जनगणना में आदिवासियों के लिए पृथक धर्म कोड का प्रावधान होगा। इस पर सामाजिक, धार्मिक, संवैधानिक और लोकतांत्रिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए रायशुमारी की योजना है।
सम्मेलन में असम, राजस्थान, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार सहित कई राज्यों के संगठनों की भागीदारी प्रस्तावित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अलग-अलग राज्यों के प्रमुख आदिवासी संगठनों से दो-दो प्रतिनिधियों को शामिल करने की व्यवस्था की गई है। प्रतिभागी मांग को सामूहिक रूप से आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करेंगे।
दो दिनों के संवाद में अलग धर्म कोड की मांग को केंद्र सरकार के सामने रखने के लिए साझा बिंदुओं और आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। आयोजकों की योजना सम्मेलन के अंतिम दिन एक साझा घोषणापत्र तैयार करने और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर सहमति बनाने की है। सम्मेलन के निष्कर्ष और अंतिम फैसले बैठक पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।