आईआईटी-आईएसएम धनबाद की शोधार्थी को खराब लिथियम बैटरी डिस्चार्ज तकनीक पर पेटेंट

प्रतिमा कुमारी की विकसित प्रक्रिया में खराब लिथियम-आयन बैटरी के टर्मिनलों को नमक के घोल में आंशिक रूप से डुबोकर अल्ट्रासोनिक तरंगों से शेष चार्ज खत्म किया जाता है।

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आईआईटी-आईएसएम धनबाद की शोधार्थी की लिथियम बैटरी डिस्चार्ज तकनीक

धनबाद स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-आईएसएम) की शोधार्थी प्रतिमा कुमारी ने इस्तेमाल के बाद बेकार हो चुकी लिथियम-आयन बैटरियों को सुरक्षित ढंग से डिस्चार्ज करने की तकनीक विकसित की है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, भारत सरकार ने इस प्रक्रिया को पेटेंट प्रदान किया है। शोध का उद्देश्य रीसाइक्लिंग से पहले बैटरी में बचा विद्युत चार्ज समाप्त करना है, ताकि आग लगने, विस्फोट और रासायनिक रिसाव जैसे जोखिम कम किए जा सकें।

मोबाइल फोन, लैपटॉप और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में लिथियम-आयन बैटरियों का व्यापक उपयोग होता है। खराब बैटरियों में मौजूद शेष चार्ज उनके निस्तारण और रीसाइक्लिंग को चुनौतीपूर्ण बनाता है। मौजूदा कुछ प्रक्रियाओं में बैटरी को रासायनिक या इलेक्ट्रोलाइट घोल में पूरी तरह डुबोया जाता है, जिससे अधिक तरल की जरूरत पड़ती है और घोल में बैटरी के रसायन मिलने का खतरा रहता है।

नई प्रक्रिया में बैटरी को सीधा रखकर केवल धनात्मक और ऋणात्मक टर्मिनल वाले हिस्से को सोडियम क्लोराइड यानी साधारण नमक के घोल में आंशिक रूप से डुबोया जाता है। इसके बाद अल्ट्रासोनिक तरंगों की सहायता से बैटरी के भीतर बचा चार्ज खत्म किया जाता है। इस व्यवस्था में बैटरी का मुख्य ढांचा घोल से बाहर रहता है।

शोध आईआईटी-आईएसएम के पर्यावरण विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर सुख रंजन समद्दर के मार्गदर्शन में पूरा किया गया। पेटेंट का आधिकारिक नाम ‘प्रोसेस ऑफ डिस्चार्जिंग स्पेंट-लिथियम कोबाल्ट ऑक्साइड बैटरीज यूजिंग अल्ट्रासोनिक असिस्टेड पार्शियल इमर्शन मेथड’ बताया गया है। प्रतिमा कुमारी जमशेदपुर के कदमा क्षेत्र की निवासी हैं।

आंशिक रूप से डुबोने की इस विधि में पानी और रसायनों की खपत घटने की संभावना बताई गई है। मुख्य बैटरी ढांचा घोल से बाहर रहने के कारण दूषित रासायनिक कचरे की मात्रा भी कम हो सकती है। सुरक्षित डिस्चार्ज की प्रक्रिया रीसाइक्लिंग संयंत्रों में कार्यरत कर्मियों के लिए आग और रासायनिक रिसाव से जुड़े जोखिम घटाने में सहायक हो सकती है।

तकनीक में इस्तेमाल होने वाला नमक कम लागत वाला और आसानी से उपलब्ध पदार्थ है। इस कारण प्रक्रिया को औद्योगिक स्तर पर अपनाने की व्यावहारिक संभावना सामने रखी गई है। यह पेटेंट इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सुरक्षित प्रबंधन और इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों की रीसाइक्लिंग से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों के समाधान की दिशा में धनबाद संस्थान का एक महत्वपूर्ण शोध परिणाम है।