साहिबगंज जिले के राजमहल थाना क्षेत्र के मानसिंघा गांव निवासी यासीन शेख नौ साल बाद अपने परिवार के पास लौट आए हैं। मंगलवार को केरल स्थित हेल्थ केयर फाउंडेशन के दो प्रतिनिधि उन्हें राजमहल लेकर पहुंचे। थाना परिसर में स्थानीय जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में यासीन को उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सोहराब शेख के पुत्र यासीन मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं और करीब नौ वर्ष पहले घर से भटक गए थे। वह पहले मुंबई पहुंचे और बाद में केरल के कोझिकोड जिले के चेरुवाडी इलाके में मिले। ठीक से बोल नहीं पाने तथा अपना नाम और पता स्पष्ट रूप से नहीं बता पाने के कारण लंबे समय तक उनकी पहचान स्थापित नहीं हो सकी।
केरल की बाल कल्याण समिति और हेल्थ केयर फाउंडेशन ने यासीन को संरक्षण दिया। इसी दौरान उनसे संबंधित एक वीडियो इंस्टाग्राम रील के रूप में प्रसारित हुआ। इसे देखने के बाद परिवार के सदस्यों ने यासीन को पहचान लिया। इसके बाद केरल में काम करने वाले गांव के लोगों के माध्यम से संस्था से संपर्क किया गया और पहचान से जुड़ी जानकारी साझा की गई।
सूचना मिलने पर यासीन के परिजन केरल पहुंचे और उन्हें वापस लाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की। मंगलवार को फाउंडेशन के सचिव अखिल और पदाधिकारी समसुद्दीन उन्हें लेकर राजमहल आए। यहां नगर पंचायत अध्यक्ष केताबुद्दीन शेख और थाना प्रभारी हसनैन अंसारी की उपस्थिति में सुपुर्दगी की प्रक्रिया पूरी हुई।
नौ साल बाद यासीन के सकुशल लौटने से परिवार में खुशी का माहौल है। लंबे समय तक उनका ठिकाना पता नहीं चलने के कारण परिजन उनसे दूर रहे। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो ने उनकी पहचान और परिवार तक पहुंचने की कड़ी तैयार की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच संपर्क संभव हो सका।
फाउंडेशन ने यासीन के भविष्य और रोजगार की जरूरत को ध्यान में रखते हुए मवेशी खरीदने के लिए 30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी दी। परिवार को सौंपे जाने के साथ ही उनकी वापसी की लंबी प्रक्रिया पूरी हुई। यह मामला किसी लापता व्यक्ति की पहचान में संस्थागत सहयोग, स्थानीय संपर्क और सोशल मीडिया की भूमिका को रेखांकित करता है।