ईडी अधिकारियों की याचिका पर सरकार का जवाब नहीं, हाईकोर्ट ने लगाया आठ हजार रुपये का हर्जाना

झारखंड हाईकोर्ट ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एससी-एसटी मामले में राज्य सरकार द्वारा जवाब दाखिल नहीं करने पर आठ हजार रुपये का हर्जाना लगाया। अगली सुनवाई नौ दिसंबर को होगी।

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रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट भवन का दृश्य

रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई की। राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर अदालत ने आठ हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। मामले की अगली सुनवाई नौ दिसंबर को निर्धारित की गई है।

जस्टिस एके चौधरी की अदालत ने हर्जाने की राशि झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के पास जमा कराने का निर्देश दिया। सरकार ने जवाब देने के लिए अदालत से और समय मांगा था। याचिका ईडी के तत्कालीन अधिकारियों कपिल राज और देवव्रत झा समेत अन्य की ओर से दाखिल की गई है।

याचिकाकर्ताओं ने रांची के एससी-एसटी थाने में दर्ज प्राथमिकी को निराधार बताते हुए उसे रद्द करने का आग्रह किया है। सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा। अदालत ने इससे पहले राज्य सरकार को मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।

यह प्राथमिकी हेमंत सोरेन ने 31 जनवरी 2024 को दर्ज कराई थी। शिकायत में कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार और अमन पटेल सहित अन्य अज्ञात लोगों को आरोपित किया गया था। प्राथमिकी में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक विचाराधीन हैं और अदालत ने उनके गुण-दोष पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है।

शिकायत के अनुसार, ईडी अधिकारियों ने हेमंत सोरेन को 29 से 31 जनवरी 2024 के बीच रांची में रहने के लिए कहा था। आरोप लगाया गया कि इसी अवधि में उनकी अनुपस्थिति के दौरान दिल्ली स्थित आवास पर बिना पूर्व सूचना के तलाशी की कार्रवाई हुई। शिकायत में मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना के साथ मीडिया के माध्यम से भ्रामक सूचना फैलाकर छवि प्रभावित करने का आरोप भी लगाया गया था।

मौजूदा सुनवाई प्राथमिकी रद्द करने की मांग पर केंद्रित है। ईडी अधिकारियों ने आरोपों का विरोध करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है, जबकि राज्य सरकार का जवाब अभी आना बाकी है। अब हर्जाना जमा करने और जवाब दाखिल करने की प्रक्रिया के बाद नौ दिसंबर को अदालत इस याचिका पर आगे सुनवाई करेगी।