ई-वाउचर प्रक्रिया में देरी से शिक्षकों के सितंबर वेतन पर संशय, संघ ने मांगा हस्तक्षेप

शिक्षक संघ का दावा है कि डिजिटल हस्ताक्षरों की स्वीकृति लंबित रहने से अधिकांश जिलों में सितंबर का वेतन विपत्र कोषागार में जमा नहीं हो सका है।

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ई-वाउचर प्रक्रिया और सितंबर वेतन को लेकर चिंता जताते झारखंड के शिक्षक

रांची में अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने नई ई-वाउचर व्यवस्था की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण शिक्षकों के सितंबर माह के वेतन भुगतान में देरी की आशंका जताई है। संघ के अनुसार, एक-दो जिलों को छोड़कर अधिकांश जिलों में मासिक वेतन विपत्र अभी तक कोषागार में प्रस्तुत नहीं किया जा सका है।

संघ ने बताया कि वित्त विभाग ने 25 अगस्त को ई-वाउचर प्रणाली के तहत नई व्यवस्था लागू करने का आदेश जारी किया था। इसके अनुसार एक सितंबर के बाद कोषागार से विपत्रों का भुगतान नई प्रक्रिया के माध्यम से होना है। इसके लिए निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर को पहले विभाग और फिर वित्त विभाग से स्वीकृति मिलनी आवश्यक है।

शिक्षक संघ का दावा है कि स्थापना से जुड़े निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर विभाग में अधिकृत मेकर और चेकर स्तर पर करीब 15 दिनों से लंबित हैं। उसका कहना है कि वेतन विपत्र तैयार होने के बावजूद इस तकनीकी स्वीकृति के अभाव में उन्हें कोषागार तक भेजने में परेशानी आ रही है।

संघ ने 30 सितंबर को महीने का अंतिम कार्यदिवस बताते हुए आशंका जताई कि प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हुई तो सितंबर का वेतन निर्धारित समय पर मिलना कठिन हो सकता है। उसने वित्त विभाग के 30 जुलाई के उस आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें विभागीय प्रधानों को अंतिम बैंक कार्यदिवस पर कर्मियों का वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।

संगठन के पदाधिकारियों ने शिक्षा सचिव से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी पहली मांग संबंधित अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षरों को शीघ्र स्वीकृति दिलाने की है, ताकि तैयार वेतन विपत्र कोषागार में प्रस्तुत किए जा सकें। प्रक्रिया पूरी होने में और समय लगने की स्थिति में विपत्र पारित करने की समय-सीमा बढ़ाने का विकल्प भी सुझाया गया है।

संघ का कहना है कि अक्टूबर के पूर्वार्द्ध में दुर्गापूजा को देखते हुए वेतन में संभावित देरी शिक्षकों और कर्मचारियों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि उपलब्ध विवरण में वेतन भुगतान रोके जाने का कोई अंतिम सरकारी निर्णय नहीं बताया गया है; फिलहाल चिंता प्रक्रिया लंबित रहने और समय-सीमा समाप्त होने की आशंका को लेकर है।