झारखंड सरकार ने राज्य के 13 विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक भूमिका और अधिकार क्षेत्र तय कर दिए हैं। असाधारण गजट में नौ विश्वविद्यालयों को शिक्षण-केंद्रित संबद्ध विश्वविद्यालय और चार को शोध-केंद्रित एकल विश्वविद्यालय की श्रेणी में रखा गया है। इस वर्गीकरण के आधार पर संस्थानों के शिक्षण, कॉलेज संबद्धता और शोध संबंधी दायित्व अलग-अलग होंगे।
शिक्षण-केंद्रित विश्वविद्यालयों का प्रमुख दायित्व बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को शिक्षा देने और संबद्ध कॉलेजों की व्यवस्था संभालने का होगा। इनमें प्रवेश, परीक्षा, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन, परिणाम, डिग्री तथा कॉलेजों से जुड़े प्रशासनिक कार्यों को प्राथमिकता मिलेगी। इस श्रेणी में कुल नौ विश्वविद्यालय रखे गए हैं।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय, पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय और झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय को शोध-केंद्रित एकल विश्वविद्यालय बनाया गया है। इन चारों का अधिकार क्षेत्र पूरा झारखंड होगा। यहां स्नातकोत्तर और पीएचडी अध्ययन, शोध परियोजनाओं, प्रयोगशालाओं, शोध-पत्रों, जर्नल तथा पेटेंट गतिविधियों को प्रमुखता देने की अवधारणा है।
गजट में विभिन्न विश्वविद्यालयों के भौगोलिक अधिकार क्षेत्र भी स्पष्ट किए गए हैं। रांची विश्वविद्यालय को दक्षिण छोटानागपुर प्रमंडल और कोल्हान विश्वविद्यालय को कोल्हान प्रमंडल का क्षेत्र मिला है। नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय का अधिकार क्षेत्र पलामू प्रमंडल रहेगा। विनोबा भावे विश्वविद्यालय के क्षेत्र से बोकारो, धनबाद, गिरिडीह और कोडरमा को अलग रखा गया है।
बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय को बोकारो और धनबाद, जबकि सर जेसी बोस विश्वविद्यालय को गिरिडीह और कोडरमा का क्षेत्र दिया गया है। बाबा बैद्यनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय और झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का अधिकार क्षेत्र पूरे राज्य में रहेगा। एकल विश्वविद्यालयों में प्रवेश संबंधित संस्थान के पाठ्यक्रम, उपलब्ध सीटों और प्रवेश नियमों के अनुसार होगा।
नई व्यवस्था के तहत सभी विश्वविद्यालयों से एक समान दायित्व लेने के बजाय उनकी संरचना के अनुरूप प्राथमिकताएं निर्धारित की गई हैं। एक मॉडल का जोर विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंचाने और संबद्ध कॉलेजों के संचालन पर रहेगा, जबकि दूसरे में उच्च शिक्षा एवं शोध गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा। अब इस गजट आधारित वर्गीकरण को संस्थागत स्तर पर लागू किया जाना है।