एम्स देवघर में बैलून प्रक्रिया से दो मरीजों के संकुचित हृदय वाल्व का इलाज

एम्स देवघर के हृदय रोग विभाग ने पहली बार बैलून की मदद से संकुचित माइट्रल वाल्व खोलने की प्रक्रिया की। संस्थान के अनुसार, दोनों मरीजों का इलाज बिना जटिलता के पूरा हुआ।

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एम्स देवघर में हृदय वाल्व के उपचार से जुड़ी चिकित्सकीय टीम

देवघर स्थित एम्स के हृदय रोग विभाग में पहली बार बैलून की सहायता से संकुचित हृदय वाल्व खोलने की प्रक्रिया पूरी की गई। संस्थान से संबंधित प्रकाशित विवरण के मुताबिक, गंभीर रूप से संकुचित माइट्रल वाल्व और फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में बढ़े दबाव से जूझ रहे दो मरीजों का इस पद्धति से इलाज किया गया।

इलाज कराने वाले मरीजों की उम्र 22 और 33 वर्ष बताई गई है। दोनों प्रक्रियाएं बिना किसी जटिलता के पूरी हुईं। उपचार के बाद मरीजों की तकलीफ में तत्काल सुधार देखा गया और वाल्व के खुलने का क्षेत्रफल भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा।

माइट्रल वाल्व में संकुचन होने से हृदय के भीतर रक्त के सामान्य प्रवाह में रुकावट आ सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ऐसी स्थिति में मरीजों को सांस लेने में परेशानी के साथ दूसरी तकलीफें भी हो सकती हैं। दोनों मरीज इसी प्रकार की गंभीर स्थिति से प्रभावित थे।

प्रक्रिया के दौरान जांघ की नस और धमनी के रास्ते एक पतली नली हृदय तक पहुंचाई गई। इसके माध्यम से विशेष बैलून को संकुचित वाल्व के पास ले जाकर फुलाया गया, जिससे वाल्व खुल सका। इस पद्धति में बड़ा चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

यह उपचार हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सीबी पांडेय और डॉ. स्मारक के नेतृत्व में विभागीय टीम ने पूरा किया। टीम ने इस सुविधा की शुरुआत में एम्स देवघर के कार्यकारी निदेशक से मिले मार्गदर्शन और प्रोत्साहन का भी उल्लेख किया है।

संस्थान में इस प्रक्रिया का शुरू होना देवघर में उन्नत हृदय उपचार की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रकाशित विवरण में कहा गया है कि इस पद्धति के लिए उपयुक्त मरीजों को अब इलाज कराने के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उन्हें एम्स देवघर में ही यह सुविधा मिल सकेगी।