झारखंड के छह शहरों में रेडिएशन सेंटर की योजना, मेडिकल कॉलेजों में कैंसर डे-केयर का प्रस्ताव

राज्य सरकार ने रांची समेत छह शहरों में रेडिएशन सेंटर विकसित करने और मेडिकल कॉलेजों में पीपीपी मॉडल पर कैंसर डे-केयर इकाइयां शुरू करने की योजना बनाई है।

2 मिनट पढ़ें 4 बार पढ़ी गई
झारखंड में प्रस्तावित कैंसर उपचार और रेडिएशन सेंटर की प्रतीकात्मक तस्वीर

झारखंड सरकार ने कैंसर के उपचार की सुविधाएं राज्य के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने के लिए छह शहरों में रेडिएशन सेंटर विकसित करने की योजना तैयार की है। इसके साथ ही सभी मेडिकल कॉलेजों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल पर कैंसर डे-केयर इकाइयां शुरू करने का प्रस्ताव है। योजना अभी तैयारी और विभागीय प्रक्रिया के स्तर पर है।

स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने इस संबंध में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में अधिकारियों को आवश्यक प्रस्ताव तेजी से तैयार करने का निर्देश दिया गया। प्रस्तावित केंद्रों को दो समूहों में विकसित करने की रूपरेखा बनाई गई है।

पहले समूह में जमशेदपुर, धनबाद और दुमका को शामिल किया गया है। दूसरे समूह में रांची, हजारीबाग और पलामू रखे गए हैं। उपलब्ध योजना के अनुसार, इन केंद्रों पर कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली लीनैक मशीनें लगाने का प्रस्ताव है। रांची, जमशेदपुर और धनबाद में पीईटी स्कैन सुविधा के विस्तार की भी तैयारी है।

जिला अस्पतालों में कीमोथेरेपी सेवाओं को मजबूत करने के लिए उपकरणों, दवाओं और मानवबल की जरूरत का विस्तृत आकलन कराया जाएगा। साधारण डे-केयर केंद्रों में प्रशिक्षित चिकित्सा पदाधिकारियों से सेवा लेने और रेडिएशन सेंटरों में विशेषज्ञ चिकित्सकों को तैनात करने की योजना है। विशेषज्ञों तथा रेडियो फिजिसिस्ट की उपलब्धता से जुड़ी जरूरतों के लिए बिहार के कैंसर डे-केयर मॉडल का अध्ययन भी किया जाएगा।

प्रस्ताव के मुताबिक, आयुष्मान भारत और अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के कार्डधारियों को निर्धारित पैकेज के अंतर्गत कैशलैस उपचार देने की व्यवस्था होगी। अन्य मरीजों के लिए सीजीएचएस दरों पर शुल्क निर्धारित करने की योजना है। हालांकि इन सुविधाओं के लागू होने की समयसीमा और अंतिम शुल्क संबंधी विवरण अभी सामने नहीं आया है।

पूरे नेटवर्क की निगरानी के लिए रिम्स में केंद्रीय कमांड एवं कंट्रोल सेंटर बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। टेंडर प्रक्रिया और केंद्र सरकार के वीजीएफ फंड से संबंधित स्वीकृतियों की निगरानी के लिए विशेष विभागीय समिति गठित करने की तैयारी भी है। प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी और क्रियान्वयन मिलने के बाद ही केंद्रों के संचालन की स्पष्ट स्थिति सामने आएगी।