रांची से मिली जानकारी के अनुसार, झारखंड में केंद्रीय योजनाओं से जुड़े भुगतान की गति धीमी होने से कई विभागों की परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। मीडिया रिपोर्ट में इसकी प्रमुख वजह एसएनए स्पर्श व्यवस्था के तहत बिल पास करने की प्रक्रिया को बताया गया है। मनरेगा से संबंधित पुराने भुगतान भी अब तक लंबित बताए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, एसएनए स्पर्श लागू करते समय भुगतान को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने की बात कही गई थी। हालांकि, विभागों से मिल रही सूचनाओं में प्रक्रिया के व्यावहारिक स्तर पर कठिन होने का दावा किया गया है। ट्रेजरी में बिल भेजने के लिए बड़ी मात्रा में विवरण दर्ज करना पड़ता है और कोई आंकड़ा अधूरा रहने पर बिल रुकने या रद्द होने की स्थिति बन सकती है।
इस देरी का असर कार्य विभागों के बजट और पहले से पूरी हो चुकी परियोजनाओं के भुगतान पर भी पड़ने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मनरेगा बंद हुए लगभग दो महीने बीतने के बाद भी उससे जुड़े भुगतान पूरे नहीं हुए हैं। विकसित भारत जीरामजी योजना में बिल तैयार करने और भुगतान शुरू करने की प्रक्रिया भी धीमी बताई गई है।
जल संसाधन विभाग में विभागीय स्तर पर चार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान अटका होने का दावा है। इसके अतिरिक्त, बिल पारित होने के बाद ट्रेजरी में 60 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लंबित बताया गया है। नगर विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं के करोड़ों रुपये भी नहीं निकल पाने की सूचना दी गई है।
जिलावार स्थिति में गिरिडीह की योजनाओं से जुड़े भुगतान का विशेष उल्लेख किया गया है। वहां करीब 35 करोड़ रुपये के बिल बनने और उनमें लगभग 17 करोड़ रुपये के बिल ट्रेजरी में लंबित होने की जानकारी है। पलामू में इससे भी बड़ी राशि फंसी होने का दावा किया गया है। रांची, धनबाद और बोकारो की कई योजनाओं के भुगतान पर भी असर बताया गया है।
झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, अन्य राज्यों से भी इस व्यवस्था को लेकर शिकायतें केंद्र सरकार तक पहुंच रही हैं और झारखंड ने भी अपनी समस्या केंद्र के सामने रखी है। फिलहाल उपलब्ध विवरण में भुगतान सामान्य होने की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है। लंबित राशि निकलने में देरी से परियोजनाओं और संबंधित मजदूरों तथा ठेकेदारों की परेशानी बनी हुई है।