एसएलबीसी बैठक में वित्त मंत्री का दावा, केंद्रीय नीतियों से झारखंड को 22 हजार करोड़ का नुकसान

रांची में हुई एसएलबीसी की 96वीं त्रैमासिक बैठक में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बैंकों से राज्य के विकास, वित्तीय समावेशन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहयोग मांगा।

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रांची में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक को संबोधित करते वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर

रांची के बरियातू में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 96वीं त्रैमासिक बैठक में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्रीय नीतियों के कारण राज्य को करीब 22 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने का दावा किया। गुरुवार को हुई बैठक में उन्होंने बैंकों से झारखंड के विकास और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग बढ़ाने की अपील की।

वित्त मंत्री के अनुसार, जीएसटी स्लैब में बदलाव से राज्य को करीब चार हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। उन्होंने मनरेगा के नाम और केंद्र-राज्य हिस्सेदारी के अनुपात में बदलाव से भी लगभग चार हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात कही। किशोर ने दावा किया कि खनन संशोधन कानून के कारण झारखंड पर करीब 14 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय असर पड़ा है।

बैठक में राज्य की बैंकिंग स्थिति के आंकड़े भी रखे गए। वित्त मंत्री ने बताया कि झारखंड का ऋण-जमा अनुपात 50.22 प्रतिशत से बढ़कर 54.97 प्रतिशत हो गया है। इसे राज्य के आर्थिक विकास और वित्तीय समावेशन के लिए सकारात्मक संकेत बताया गया। एसएलबीसी के संयोजक गुरु प्रसाद गोंड के मुताबिक, जून 2026 तक राज्य में कुल जमा राशि 4,04,979 करोड़ रुपये और कुल ऋण 1,82,282 करोड़ रुपये था। सकल एनपीए घटकर 4.30 प्रतिशत रह गया है।

किशोर ने कहा कि राज्य में अभी 4,755 बैंक शाखाएं हैं, जबकि आबादी और वित्तीय जरूरतों को देखते हुए एक हजार अतिरिक्त शाखाओं की आवश्यकता है। उन्होंने बूढ़ा पहाड़ जैसे उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के साथ बड़गढ़, गलवार, पीताबाद और चटोर चट्टी जैसे गांवों में भी बैंक शाखाएं खोलने की जरूरत बताई।

वित्त मंत्री ने कृषि ऋण पर विशेष ध्यान देने का आग्रह करते हुए कहा कि राज्य की 70 से 80 प्रतिशत आबादी कृषि क्षेत्र पर निर्भर है। उन्होंने कृषि क्षेत्र में दिए गए ऋण के उपयोग और उससे प्राप्त परिणामों का मूल्यांकन जरूरी बताया। उनके अनुसार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने के लिए ग्रामीण इलाकों में लोगों की आर्थिक स्थिति सुधारना आवश्यक है।

बैठक में जन धन योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना, सुरक्षा बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, स्वयं सहायता समूह और मुद्रा योजना पर बैंकों से अधिक ध्यान देने को कहा गया। वित्त मंत्री ने महिलाओं, किसानों और कमजोर वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने तथा केंद्र और राज्य की योजनाओं को लाभार्थियों तक पहुंचाने में बैंकिंग व्यवस्था की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।