दुमका में सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उच्च शिक्षा और शोध को संताल परगना की जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में होने वाले अध्ययन और अनुसंधान का लाभ समाज तक पहुंचना चाहिए तथा विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा का उपयोग स्थानीय समस्याओं के समाधान में करना चाहिए।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के नाम से जुड़े सिदो और कान्हू सहित संताल हूल के नायकों के योगदान को याद किया। उन्होंने वर्ष 1855 के संताल हूल को अन्याय और शोषण के विरुद्ध साहस, स्वाभिमान और एकजुटता का प्रतीक बताया। उनके अनुसार, सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो की विरासत संस्कृति, अस्मिता और सम्मान के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने संताल परगना की जनजातीय संस्कृति, भाषाओं, परंपराओं और लोक ज्ञान को महत्वपूर्ण धरोहर बताते हुए इनके संरक्षण की आवश्यकता रखी। राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ आगे बढ़ते समय इस विरासत को भी सहेजना जरूरी है। उन्होंने कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण, प्राथमिक शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़ी चुनौतियों पर उपयोगी शोध को प्रोत्साहित करने की बात कही।
युवाओं की भूमिका पर चर्चा करते हुए राज्यपाल ने उन्हें कौशल, नवाचार और उद्यमशीलता विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को बढ़ावा देने की अपील की तथा कहा कि विद्यार्थियों को केवल नौकरी तलाशने तक सीमित रहने के बजाय नए अवसर पैदा करने की क्षमता भी विकसित करनी चाहिए।
राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से कम से कम एक ऐसे जरूरतमंद बच्चे या व्यक्ति को शिक्षा से जोड़ने का संकल्प लेने का आह्वान किया, जो सामाजिक या आर्थिक कारणों से पढ़ाई से वंचित रह गया हो। उन्होंने ज्ञान साझा करने को समाज में व्यापक बदलाव का माध्यम बताया और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
समारोह में विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने भी उपाधि और स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक उपलब्धि के बाद सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में जिम्मेदारियों का नया चरण शुरू होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कर्मक्षेत्र में निष्ठा, समर्पण और जवाबदेही बनाए रखने तथा अपनी डिग्री और पदक की प्रतिष्ठा के अनुरूप कार्य करने को कहा।