काठीकुंड के दो गांवों में सड़क, पानी और बिजली का संकट; उपायुक्त ने दिए जांच के आदेश

दुमका के खिलौड़ी और तैतूलपाड़ा गांवों के लोगों ने बुनियादी सुविधाओं और अधूरे आवासों की शिकायत उपायुक्त से की है। प्रशासन ने मामले की जांच कराने का भरोसा दिया है।

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दुमका के काठीकुंड क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की मांग करते ग्रामीण

दुमका जिले के काठीकुंड प्रखंड की बड़ताला पंचायत स्थित खिलौड़ी और तैतूलपाड़ा गांवों के ग्रामीणों ने सड़क, बिजली, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को लेकर जिला प्रशासन से शिकायत की है। स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं मिलने का हवाला देते हुए ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे और उपायुक्त के सामने अपनी समस्याएं रखीं।

ग्रामीणों के अनुसार दोनों गांवों तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं है। लोगों को पथरीले और दुर्गम रास्तों से आवागमन करना पड़ता है। उनका कहना है कि रास्ता खराब होने के कारण किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर एंबुलेंस या दूसरी गाड़ी गांव तक नहीं पहुंच पाती। ऐसी स्थिति में मरीज को खाट पर लेकर पैदल मुख्य मार्ग तक जाना पड़ता है।

पेयजल की उपलब्धता भी शिकायत का प्रमुख हिस्सा है। ग्रामीणों ने बताया कि नियमित और सुरक्षित जलापूर्ति की व्यवस्था नहीं होने के कारण वे पहाड़ों से बहने वाले झरनों और चुआं के पानी पर निर्भर हैं। गांवों में बिजली और शिक्षा से जुड़ी जरूरी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी प्रशासन के समक्ष उठाया गया है।

ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले आवासों को लेकर भी अनियमितता का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि कुछ आवास अधूरे छोड़ दिए गए और लाभार्थियों को तिरपाल के नीचे रहना पड़ रहा है। पैसे के कथित दुरुपयोग से जुड़े इन आरोपों की अभी प्रशासनिक जांच होनी बाकी है।

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक उन्होंने पहले प्रखंड विकास पदाधिकारी से गुहार लगाई और थाने में भी आवेदन दिया था। वहां से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर वे उपायुक्त के पास पहुंचे। यह क्षेत्र आदिवासी और पहाड़िया बहुल बताया गया है, जहां ग्रामीण लंबे समय से मूलभूत सेवाओं की उपलब्धता की मांग कर रहे हैं।

मामला सामने आने के बाद दुमका उपायुक्त ने शिकायतों की जांच का आदेश दिया है। प्रशासन ने जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा भी दिया है। फिलहाल जांच का निष्कर्ष सामने नहीं आया है, इसलिए आवास योजना में गड़बड़ी से जुड़े दावों की पुष्टि आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।