सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड के सुदूर कोर्रा गांव में शिक्षक गुरुपद महतो की लगातार कोशिशों से बच्चों की विद्यालय तक पहुंच बढ़ी है। वह वर्ष 2006 से उत्क्रमित मध्य विद्यालय कोर्रा में पदस्थापित हैं। करीब दो दशकों के दौरान उन्होंने संसाधनों की कमी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच बच्चों को नियमित पढ़ाई से जोड़ने का काम किया है।
शुरुआती दौर में विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति बहुत कम थी। इसके बाद गुरुपद महतो ने स्थानीय सहायक शिक्षक एतवा मुंडा के साथ गांव में घर-घर संपर्क किया। दोनों शिक्षकों ने अभिभावकों से बच्चों को विद्यालय भेजने का आग्रह किया। इस अभियान के बाद धीरे-धीरे बच्चों का नियमित रूप से स्कूल आना बढ़ा।
विद्यालय को लंबे समय तक अपना पक्का भवन भी उपलब्ध नहीं था और कक्षाएं एक निजी मकान में संचालित होती रहीं। उपलब्ध सीमित सुविधाओं के बावजूद पढ़ाई जारी रखी गई। अब ग्रामीणों और शिक्षकों के प्रयासों के बीच विद्यालय के नए पक्के भवन का निर्माण शुरू हो गया है। निर्माण शुरू होने से गांव के लोगों में उत्साह है।
रोलाहातु पंचायत की अंतिम सीमा पर स्थित कोर्रा गांव कुचाई प्रखंड मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर है। यह गांव खूंटी जिले के अड़की प्रखंड की सीमा से सटा और पहाड़ियों की तलहटी में बसा है। मुख्य मार्ग के चलनटिकुरा चौक से स्कूल तक पहुंचने के लिए करीब चार किलोमीटर कच्चे तथा पथरीले रास्ते से गुजरना पड़ता है।
बारिश के दौरान यह रास्ता अधिक कठिन और जोखिम भरा हो जाता है। इसके बाद भी बच्चे विद्यालय पहुंच रहे हैं और शिक्षक पठन-पाठन जारी रखे हुए हैं। कोर्रा में बढ़ी छात्र उपस्थिति और नए भवन का निर्माण बताता है कि शिक्षकों तथा ग्रामीणों की निरंतर भागीदारी से दुर्गम क्षेत्र में विद्यालय की स्थिति में बदलाव आ रहा है।